कोठी-Kothi

कोठी

जिला: शिमला

हिमाचल प्रदेश

संकलन वर्ष : 1996

संग्रहालय की हिमालय ग्राम नामक मुक्ताकाश प्रर्दशनी में प्रदर्शित कोठी नामक आवास को ग्राम-देलठ जिला -शिमला, हिमाचल प्रदेश से सन् 1996 में संग्रहित किया गया था। यह देलठ के तत्कालीन राजा के महल का एक हिस्सा है जिसे खोलकर इसकी पूरी सामग्री को संग्रहालय में लाया गया तथा इसको हिमाचल के कलाकारों द्वारा ही पुर्नसंयोजित किया गया। यह दो मंजिला मकान अपने आप में बड़ा ही रोचक, अनोखा व अपने आप में एक अलग तरह का लकड़ी एवं पत्थरों से बना घर है। इसकी दीवारें पूरी तरह से तराशे हुये पत्थरों की बनी हुई है तथा ऊपरी मंजिल का फर्श लकड़ी का बना हुआ है। छत में लकड़ियों के ऊपर पत्थर की स्लेट रखी हुई हैं। घर की पहली मंजिल पर दाॅयी व बाॅयी ओर लगभग 2 फीट का लकड़ी का बरामदा निकला हुआ है, जिसे बैठने के लिये उपयोग में लाया जाता है। घर के अन्दर ही अन्दर ऊपरी मंजिल में जाने के लिये लकड़ी की सीढ़ियों का रास्ता बना हुआ होता है जिसे प्रमुखतः बारिश या बर्फ गिरने के समय प्रयोग में लाया जाता है। घरों के सामने लकड़ी एवं पत्थर के बने द्वारों को प्रचलन है जिसे परोल कहा जाता है जो कि घर-आंगन की खूबसूरती को बढ़ाता है।

            संग्रहालय में यह आवास लोक ज्ञान और परम्परा का एक बेजोड़ नमूना है। यह आवास दर्शाता है कि हिमालयी क्षेत्रों की पारम्परिक वास्तुकला वहां के जलवायु तथा उपलब्ध संसाधनों पर आधारित है। इनकी निर्माण संरचना इस क्षेत्र मे निवासरत् लोगों के अनुकूल होती है।

            वर्तमान समय में पत्थर एवं लकड़ी के पुराने घरों का बनना लगभग बन्द हो गया है। इनकी जगह ईंट, सीमेन्ट व लोहे से बने मकानों ने ले ली है। धीरे-धीरे हिमालयी क्षेत्रो में प्रचलित यह पारम्परिक वास्तुकला लुप्त होती जा रही है।

Kothi

District- Shimla

Himachal Pradesh

Year of Collection: 1996

This traditional house type exhibited in the ‘Himalayan Village’ open air exhibition of the IGRMS was collected from Delath village of Shimla district, Himachal Pradesh. This is one portion of the palace of the then king of Delath. It was brought to the museum along with all its material after dismantling and was reinstalled here by the artists from Himachal Pradesh itself. This double storied house is very interesting and unique and is made up of a different type of wood and stone. Walls of the house are made with cut stones whereas the upper floor is made of wood; the two layered ceiling consists of a wooden roof which is covered with stone slates. First floor of the house has nearly two feet wide wooden corridors in both left and right sides, and both sides are usually used for sitting purpose. There is a wooden staircase inside the house for access to the upstairs. It is mostly used during rains or snowfall.

            The wooden and stone gate called Parol in front of the house is a common trend which enhances the beauty of house and courtyard.

            This exhibit in the museum is a unique example of folk knowledge and tradition. This house also shows that the traditional architecture of Himalayan region is based on ecology and the available resources. Their construction is suitable to the people of the area. Construction of such old pattern stone and wood houses is almost vanished and replaced by the structures made of bricks, cement and steel. This traditional architecture knowledge prevalent in the Himalayan region is also on the verge of extinction.