ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-5

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-5

शैलकला धरोहर

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार का एक स्वायत्तशासी संस्थान है। यह संग्रहालय भारत के ह्रदय मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है। अपने आकार, समुदायों के प्रतिनिधित्व और संकलन के संदर्भ में यह अपनी तरह का सबसे विशाल मानव शास्त्रीय संग्रहालय है।

Museums within a museum – A museum without wall – Museum beyond the conventional concept of museum or A museum where the culture is experienced ऐसे ही कई उपनामों और विशेषणों से ज्ञात मानव संग्रहालय को खास बनाती इसकी मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में से एक है ‘शैलकला धरोहर’ दुनिया भर में इसे एक अनूठे संग्रहालय के रूप में प्रतिष्ठित करती है।

कहने की जरूरत नहीं कि दुनिया में ऐसा कोई दूसरा संग्रहालय नहीं है जिसके परिसर में ही आदि मानव के आवास यानी प्राकृतिक शैलाश्रय और वो भी उनके द्वारा उकेरे गये चित्रों के साथ वास्तविक रूप मंे मौजूद हैं। यह संग्रहालय एक मानव शास्त्रीय संग्रहालय के रूप में मानव के जैव सांस्कृतिक उदविकास की समेकित गाथा को एक कथानक की तरह दिखाने और समझाने हेतु संकल्पित है उस स्थिति में ये शैलाश्रय एक कहानी के आमुख या शुरूवाती कड़ियों की तरह प्रस्तुत होते हैं।

और साथ ही अपने आप में उत्तर हैं उस जिज्ञासा का कि जिस भूभाग पर देश के कोने-कोने से लाये गये विभिन्न समुदायों के आवास प्रकार प्रत्यारोपित हैं क्या वहां पर भी कभी बसाहट थीं।

बीती सदी के नौवें दशक के प्रारंभ में खोली गई इस प्रदर्शनी में सरसरी तौर पर प्राकृतिक वनस्पतियों की चादर ओढे कुछ 36 शैलाश्रय केवल मानव संग्रहालय ही नहीं बल्कि संपूर्ण मानवजाति की धरोहर हैं और शोध व रूचि का विषय हैं प्रागैतिहास, मानवशास्त्र, प्राणी विज्ञान और कई दूसरे विषय के शोधकर्ताओं और विघार्थियों की।

तीन ओर से पहाड़ियो और एक ओर विस्तृत झील से घिरे लगभग 200 एकड के मानव संग्रहालय के विशाल परिसर में तीनों ही पहाड़ी क्षेत्रों में शैलाश्रयों की श्रृंखला है जिसमें सर्वाधिक चित्रयुक्त 11 शैलाश्रय शामला पहाडी स्थित रीजनल कौलेज के पीछे वाले हिस्से में है।

मध्यपाषाण युगीन मानव की वर्तमान को धरोहर मानव संग्रहलाय के चित्रित शैलाश्रय कई कारणों से खास एवं महत्वपूर्ण है। यहां इनकी पुरातनता या कालक्रम पर प्रश्न स्वाभाविक है इस क्षेत्र में सतह पर मिले माइक्रोलिथ यानी सूक्ष्म पाषाण उपकरणों
और बाद में इस स्थल पर पुरातत्वविदों द्वारा किये गये कतिपय अध्ययनों के आधार पर इन्हें मध्य पाषाण से ताम्रपाषाणकाल का माना जा सकता है।

प्रदर्शनी के इस भाग में भैंस, गाय, बैल, आदि पालतू पशु हिरण, बारहसिंगा, सुअर, बंदर, गैंडा जैसे वन्य पशु और मोर जैसे पक्षी के 175 चित्र (सभी 11 गुफाओं में) पुरूष, स्त्री, मुखौटाधारी मानव सहित करीब 75 मानवाकृतियां गुफा क्र 22 एवं 21 में हैं। जिनकी गणना 1990-91 में प्रदर्शनी के लोकार्पण के पूर्व इसके संयोजक संग्रहालय के पूर्व कार्यकारी निदेशक एवं क्यूरेटर श्री विकास भट्ट तथा सहायक क्यूरेटर श्री देवेंद्र कुमार जैन के निर्देशन में प्रलेखन दल द्वारा की गई थी। करीब 36 साल पहले गिने गये इन चित्रों में कुछ अत्यंत धुंधले हो गये हैं और बडे़ अस्पष्ट से दिखते हैं तो कई तो अब भी बिल्कुल साफ दिखते और पहचाने जा सकते हैं। और बहुत सहायक है तत्कालीन मानव समूहों और उनकी जीवनशैली का अनुमान लगाने में।

इनकी चर्चा हम आने वाली कड़ियों में कारेंगें। तब तक हमसे जुडे रहिए और अपने सुझाव हमें भेजते रहिये।

Rock Art Heritage

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya ( National Museum of Mankind), an autonomous organisation, Ministry of culture, Govt.of India. The Museum is located in the heart of India,the capital city of Bhopal in Madhya Pradesh. It is one of the largest anthropological / ethnographic museums in terms of its size, representation of communities and collection.

Museums within a museum/a museum without walls/ museum beyond the conventional concepts of museums and museum where the culture is experienced, known with several similar subtitles and adjectives Manav Sangrahalaya is unique because of its open air exhibition and the Rock Art Heritage is one of them that gives it a unique position across the world.

Needless to say that there is no other museum in the world where Rock shelter with original paintings painted by prehistoric human exist in natural form.

Being an anthropological museum this museum is conceived to depict the story of bio-cultural evolution of mankind and in that situation these shelters serve as prelude of the story and also at the same time an answer to the curiosity that a place where house types of various communities from various parts of the country have been installed; also had any human settlement over the past.

Opened in 9th decade of last century this exhibition has altogether 36 Rock shelters covered with natural vegetation. These shelters are not merely the asset of IGRMS but this heritage belongs to entire humanity and also serves as the field of interest for students and researchers of prehistory, anthropology, zoology and several other subjects.

Surrounded with hills from three sides and vast lake at one side nearly 200 acre premises of Manav Sangrahalaya has a chain of rock shelters in all three hilly areas and amongst them Shamla hill area just behind the Regional College is having as much as 11 painted rock shelters.

Inherited by Mesolithic ancestors to present these painted rock shelters are special and significant for multiple reasons. Here question on antiquity of these shelters is obvious and natural. So on the basis of microliths found on surface few studies by archaeologist these shelters can be dated back from Mesolithic to Chalcolithic Period.

This part of exhibitions consist 175 painted figure of domestic animals like buffalo, cow, ox etc. wild animals like deer, boar, monkey, rhinosaur etc. and birds like peacock (in all 21 shelters). Shelter no. 22 and 21 itself consist nearly 45 anthropomorphic figures of male, female, man with bow and arrow and masked man etc which were counted by a documentation team under the direction of Shri Vikas Bhatt then curator, and former acting Director of this museum and Shri D.K. Jain, Rtd. Asstt. Curator of IGRMS at the time of its dedication in 1990-91.

Nearly 30 years back counted these figures gone fed and not easily identifiable but some are still very clear and can be identified.

These paintings are very useful for suggesting life style of the early dwellers of this territory; which will be discussed, in forth coming episodes; till that stay linked with us and keep sending your suggestion.

Video on IGRMS Rock Art Shelters at its Museum Premises, Shelter no. 22 and 21