20-26 जुलाई/July, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’ – ‘OBJECT OF THE WEEK
20-26 जुलाई, 2020 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

झाकरा असम की कोकराझार के बोडो कछारी समुदाय में मछली पकड़ने के लिए प्रयुक्त एक कांटेदार भाला है। भाला मछली पकड़ने की सबसे प्राचीन तकनीकों में से एक है जो अभी भी भारत के कई देशज समुदायों में प्रचलित है। इस बहुस्तरीय भाले को 9-12 नुकीली बांस की खपच्चियों
को आधार पर जोड़कर बनाया गया है। खपच्चियों को आधार पर एक बंडल में बांधा गया है और एक छोटे बांस के हैंडल में डाला गया है। बांस की खपच्चियों के नुकीले सिरों को लोहे से बनी शंक्वाकार टोपियों से ढक दिया गया है ताकि यह और अधिक घातक हो जाए। यह तकनीक गाँव के युवाओं में बहुत प्रचलित है जो इसे अक्सर अपने साथ ले जाते हैं और इन भालों को फेंकने में काफी कुशल होते हैं। विशेष रूप से मॉनसून के मौसम के आरंभिक दिनों में बाढ़ वाले क्षेत्रों में बड़ी मुरल मछलियां, मेजर कार्प, कैटफिश आदि का शिकार किया जाता है।

आरोहण संख्या – 93.68
स्थानीय नाम – झाकरा
, एक बहुस्तरीय कांटेदार भाला
जनजाति / समुदाय – बोडो कछारी
स्थानीयता – कोकराझार, असम
माप – लंबाई – 145 सेमी.
वर्ग – ‘ए’

‘सप्ताह का प्रादर्श’ – ‘OBJECT OF THE WEEK
(20th to 26th July, 2020)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Jhakra is a multi prong spear used for fishing among the Bodo Kachari community of Kokrajhar, Assam. Spear fishing is one of the oldest fishing techniques which is still practiced by many indigenous communities of India. This multi-pronged spear made by joining together 9-12 pointed bamboo sticks at the base. The sticks are tied into a bundle at the base and inserted into a short bamboo handle. The pointed end of bamboo sticks are covered with conical caps made of iron to make it more lethal. This technique is very common with the younger boys in the village who often carry and are quite skilled at throwing these spears. Fishes like large murrels, major carps, cat fishes etc. are hunted by this spear especially during the early part of monsoon season in flooded areas.

Accession No.-86.157
Local Name – JHAKRA, Multi-prong fishing implement
Tribe/Community – Bodo Kachari
Locality – Kokrajhar, Assam
Measurement Length – 145 cm.,
Category – ‘A’