ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-68

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -68
(30 सितंबर,
2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

मिथकवीथी मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
गुग्गा देव

हिम आच्छादित या बर्फ से ढके हिमालय के मध्य स्थित हिमाचल प्रदेश का यह नामकरण इसकी स्थिति के कारण हुआ| प्राचीन भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार हिमालय का जन्म भगवान् शिव की जटाओं से हुआ| इनकी सृष्टि देवी गंगा के स्वर्ग से धरती पर उतरते समय धरती को उनके प्रवाह से बचाने के लिए हुई|

हिमाचल प्रदेश परम्पराओं,कला और संस्कृति में अभिव्यक्त स्थानीय धरोहर का एक खजाना है| मूल में स्थानीय देवी-देवताओं का होना इस विरासत का एक अनिवार्य पक्ष है जो आज भी इस पर्वतीय क्षेत्र के रहवासियों के विश्वास व्यवस्था का अभिन्न अंग है|

गुग्गा या गुगा देव उन विभिन्न लोक देवताओं में एक है जिनके मंदिर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और कांगड़ा एवं हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों पर है| गुग्गा देव का मंदिर एक छोटा सा कमरा होता है और वहां देवता रहते है| गुग्गा देव कोई 150 साल पहले राजस्थान से हिमाचल प्रदेश लाये गए थे|

प्रति वर्ष श्रावन पूर्णिमा (रक्षाबंधन की रात) गुग्गाजी की प्रतिमा को एक सप्ताह की यात्रा (जात्रा) के लिए बाहर लाया जाता है सातवे दिन वे वापस आते है आठवी रात को पवित्र अग्नि (हवन) जलाने के साथ जागरण (जगराता) की शुरुवात होती है| गुग्गा नवमी को गुग्गा देव का जन्मदिन माना जाता है कहते है की इस दिन गुग्गा देव अपनी माँ के श्राप से मुक्त होकर प्रकट हुए थे|

Online Exhibition Series-68
(30th September, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From Open Air Exhibition Mythological Trail
Gugga Dev

Located in the midst of the snow laden Himalaya the state of Himachal Pradesh is named thus because of its location. According to ancient Indian mythology, the Himalayas were born from the tresses of Lord Siva. They were created to protect the earth from Ganga when the great river flowed down to earth.

Himachal Pradesh is a treasure trove of rich local heritage, as manifested in its traditions, art and culture. Focus on native gods and goddesses is an important aspect of this heritage, which is still an integral part of the belief system of the inhabitants of this mountain land.

Gugga or Goga Dev is one amongst the various folk deities having shrine in Sirmour and Kangra districts in Himachal Pradesh, Churu of Rajasthan and some places in Punjab, Haryana, Uttar Pradesh and Madhya Pradesh. The temple of Gugga Dev consists of a single small room and deity housed there. Guggaji or Gugga Dev was brought there from Rajasthan some 150 years ago.

Every year, on the night of the fullmoon of Shravan (Rakshabandhan) or Shravan Poornima, Guggaji is taken out of the temple for a week long yatra (procession). On the seventh day he returns and the eight night is celebrated as Jagarata begins with holy fire. Gugga Nawami is said to be the birthday of Shri Gugga Dev as he returns on this day after the curse of his mother.