27 जुलाई से 02 अगस्त, 2020/ 27th July to 2nd August, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’ – ‘OBJECT OF THE WEEK
(27 जुलाई से 02 अगस्त, 2020 तक)

कढ़ाहा, एक विशाल लोहे की कढ़ाही

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

कढ़ाहा एक विशाल कढ़ाही है जिसे स्थानीय लोहारों द्वारा लोहे की पत्तियों से सैंज शासक के संरक्षण में बनाया गया है। सैंज कभी हिमाचल प्रदेश के एक महान सैंज राजा के अधिकार क्षेत्र के तहत एक रियासत थी। यह बर्तन हाथ से बनी भारी और मोटी लोहे की चादरों को एक साथ जोड़ कर एक विशाल कटोरे के आकार में बनाया गया है। बर्तन के मुहाने पर चार छल्ले लगाए गए हैं जिनकी सहायता से इसे लाया और ले जाया जा सकता है। कढ़ाही का ढक्कन एक मोटी और गोलाकार लोहे की चादर से बना है जो दो समान भागों में विभाजित है और इसे मोड़ा जा सकता है। राजा के शासन के दौरान यह बर्तन ज्यादा मात्रा में भोजन तैयार करने के लिए उपयोग किया जाता था। महल में काम करने वाले एवं राजा के सेवकों के लिए इसमें भोजन तैयार किया जाता था। यह लोहे का पात्र डिजाइन और आकार दोनों में शानदार शिल्प कौशल के साथ लगभग 90 साल पुरानी परंपरा को दर्शाता है तथा ऐतिहासिक महत्व का है। यह सैंज शासक के शासनकाल में जनता को प्रदान की गई शाही सेवा को दर्शाता है।

आरोहण संख्या – 97.01
स्थानीय नाम – कढ़ाहा, एक विशाल लोहे की कढ़ाही
समुदाय – लोक
स्थानीयता – शिमला, हिमाचल प्रदेश
माप – ऊंचाई-90 सेमी. /व्यास- 655 सेमी.
वर्ग – ‘ए’

‘सप्ताह का प्रादर्श’ – ‘OBJECT OF THE WEEK
(27th July to 2nd August, 2020)

KARAHA, A big iron cauldron

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Karaha is a large cauldron made of iron plates by the local blacksmiths under the patronage of the Sainj ruler. Sainj was once a principality under the jurisdiction of a great Sainj King of Himachal Pradesh. The vessel is made out of a multiple hand-made heavy gauge iron sheets joined together and fashioned into the form of a huge bowl. It consists of four rings interlocked and fixed around the rim for the purpose of carrying it. The lid of the cauldron is made up of a thick and circular iron sheet pivoted into two equal halves and can be folded. The vessel was meant for the food preparation in large quantity during the rule of the King. Food was prepared for the people who work in the palace and for those who rendered services to the king. This iron vessel represents about 90 year old tradition with magnificent craftsmanship both in design and shape and bears historical importance. It reveals the royal service rendered to the public during the reign of the Sainj ruler.

Accession No.-97.01
Local Name – KARAHA, a big iron cauldron.
Tribe/Community – Folk
Locality – Shimla, Himachal Pradesh
Measurement – Height -. 90cm, diameter- 655cm
Category – ‘A’