04 से 10 अक्टूबर 2021 तक / 04th to 10th October 2021

‘सप्ताह का प्रादर्श-71’
(04 से 10 अक्टूबर 2021 तक)

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

देव नारायण महा गाथा कावड़
(देव नारायण के मिथक को दर्शाता
एक तहदार लकड़ी का मंदिर)

कावड़ एक सुवाह्य चित्रित काष्ठ देवालय है, जिसमें एक साथ जुड़े हुए लकड़ी के पटलों पर आख्यान दृश्यांकित हैं। परंपरागत रूप से ये सुतार (बढ़ई) या जोशी समुदाय द्वारा घुमंतु कावड़िया भाट कथावाचकों के लिए बनाए जाते हैं जो राजस्थान और पड़ोसी राज्यों में फैले उनके वंशानुगत संरक्षकों के लिए कावड़ वाचन करते हैं। कावड़ शब्द किवाड़ से आया हैै अर्थात एक दरवाजा जो कहानी की परतों को खोलता है। कावड़ का निर्माण तकनीकी और कलात्मक कौशल के सम्मिलन की एक श्रमसाध्य प्रक्रिया है। बढ़ई  कावड़ निर्माण के लिए अडूसा, सागवान, सालास और खिरनी वृक्ष की लकड़ी का प्रयोग करते हैं। प्रक्रिया लकड़ी के टुकड़ों को काटने के साथ शुरू होती है, उन्हें पल्लों का आकार देने के बाद उन पर स्थानीय सफेद चाक पाउडर की परत लगाई जाती है। आधार में लाल रंग और उसके बाद विभिन्न रंगों का प्रयोग किया जाता है। अधिकांश रंग खनिजों से प्राप्त होते हैं जो चूर्ण के रूप में पेड़ की राल के घोल, जो एक गोंद के रूप में कार्य करता है, के साथ मिलाए जाते हैं। अधिकांशतः सफेद, लाल, नीले, पीले, हरे और काले रंगों का प्रयोग किया जाता है। एक बार जब सभी रंग लगा दिए जाते हैं, तब विस्तृत सज्जा शुरू होती है। चित्रकार पहले एक महीन तूलिका का उपयोग करके रंगे हुए लकड़ी के पल्ले पर आकृति की रूपरेखा तैयार करते हैं। आकृतियों को क्रमशः विभिन्न परतों में उज्ज्वल रंगों से चित्रित किया जाता है। विस्तृत चित्रकारी के बाद लकड़ी के पल्लोंं को कब्जे की मदद से जोड़ा जाता है। कावड़ के माध्यम से महाभारत, रामायण और पुराणों आदि ग्रंथों की कहानियों के साथ-साथ ऐतिहासिक हस्तियों, पूर्वजों और लोककथाओं आदि का वर्णन किया जाता है। कावड़िया सबसे पहले कथा वाचन के साथ  सामने के पल्ले को खोलना शुरू करता है और धीरे-धीरे अंदर तक जाता है। कहानी के अंत में अंतिम पल्ला खोलते हुए अपने दर्शकों को देवता के दर्शन कराता है। इस कथा वाचन में दर्शकों को तीर्थ यात्रा, कथा श्रवण के तत्वों और अलौकिक संबंधों की एक साथ अनुभूति होती है। गाथा कावड़ में काष्ठ देवालय के केंद्रीय भाग में देव नारायणजी का साहसिक जीवन चित्रांकित है। भगवान विष्णु के अवतार के रूप में मान्य देवनारायण जी एक पशुपालक देवता हैं जिनमें सभी बीमारियों का इलाज करने की क्षमता है। इनकी कथा को कथावाचक घूम घूम कर गाते हैं। देव नारायण का महाकाव्य राजस्थान के सबसे लंबे और सबसे लोकप्रिय धार्मिक मौखिक आख्यानों में से एक है।

आरोहण क्रमांक –2006-106
स्थानीय नाम देव नारायण महा गाथा कावड़ (देव नारायण के मिथक को दर्शाता एक तहदार लकड़ी का मंदिर)
समुदाय – जोशी
स्थानीयता –भीलवाड़ा, राजस्थान
माप –ऊँचाई – 152.5 सेमी, चौड़ाई – 91 सेमी, मोटाई – 27 सेमी

(कपाट खुले होने की स्थिति में – एक तरफ का कपाट – 146 सेमी, दूसरी तरफ का कपाट – 134 सेमी)

OBJECT OF THE WEEK-71
(04th to 10th October 2021)

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

DEV NARAYANA MAHA
GATHA KAAVAD
(A folding, mobile wooden temple depicting the myth of Dev Narayan)

The Kaavad is a portable painted wooden shrine having visual narratives on its multiple panels hinged together. Traditionally these are made by Suthar (Carpenter community) or Joshi community for the itinerant Kaavadiya Bhat (storytellers) who perform Kaavad Baachan (recitation) for their hereditary patrons spread far wide in Rajasthan and neighbouring states. The word Kaavad comes from Kivaad means a door that open the layers of story. Kaavad making is a meticulous process involving technical and artistic skills. The carpenter uses wood of adusa, sagwan, salas and khirni tree for making Kaavad. The process starts with cutting pieces of wood, shaping them into the panels then coating  them with a local white chawk powder. Red colour is used as the base, and then different colours are used. Most of the colours are derived from minerals in the form of powder mixed with a solution of tree resin which acts as an adhesive. Mostly white, red, blue, yellow, green and black colours are used. Once all the colours are applied detailing begins. The Chitrakar first outline the figure on the painted wooden panel using a fine brush. The figures are painted with bright colours in successive layers. The painting is followed by the detailing then the wooden pieces are assembled with the help of hinges. The story from the epic Mahabharata, Ramayana and Puranas along with the stories of historical figures, ancestors and folktales are told. For reciting the story the Kaavadiya starts unfolding the front panels and proceeds gradually to the inner most one. At the end of the story he opens the final panel offering his audience a glimpse of the deity represented on it. For audiences it brings together elements of pilgrimage, storytelling and identity. In the Gatha Kaavad the bold profile of Dev Narayanaji dominates the central portion of the wooden shrine. The storytellers sing the ballad of Dev Narayanaji, a pastoral deity, considered an avatar (incarnation) of Vishnu who has the power to cure all diseases. The epic of Dev Narayana is one of the longest and most popular religious oral narratives of Rajasthan.  

Acc. No. 2006.106
Local Name  – 
 DEV NARAYANA MAHA GATHA KAAVAD (A folding, mobile wooden temple depicting the myth of Dev Narayan)
Tribe/Community –  Joshi
Locality   –  Bhilwada, Rajasthan
Measurement – Height – 152.5 cm., Width – 91 cm., Thickness – 27 cm.
(Door open condition – One side door – 146 cm., Other side – 134 cm.)

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