ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-69

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -69
(07 अक्टूबर
2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

जनजातीय आवास मुक्ताकाश प्रदर्शनी से
खारू: चाखेसांग नागा का
एक पारंपरिक ग्राम द्वार

क्षेत्र: फेक जिला
राज्य: नागालैंड

नागालैंड ऊँचे-नीचे, पहाड़ी इलाकों में बसा एक खूबसूरत राज्य है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले, अलग-अलग परंपरा और संस्कृति वाले, अलग-अलग पारंपरिक पोषाक पहनने वाले जनजातीय समुदाय निवास करते हैं जो अपने आप को नागा कहते हैं। नागालैंड भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के आठ राज्यों में से एक है, जिसमें 16 जनजातियाँ निवास करती हैं। चाखेसांग नागा उनमें से एक है। चाखेसांग अंतर्विवाही समूह नहीं है। उप जनजातीय स्तर पर अंतर्विवाह के नियम का पालन किया जाता है। नागा जनजातीय के तीन खंड चखरा, खेझा और संगताम अपने-अपने क्षेत्रों में रहते हैं, अपनी बोलियाँ बोलते हैं और विभिन्न प्रकार से अंतर्विवाह एवं अन्य संस्थागत सिद्धांतों का पालन करते हैं।

नागा लकड़ी की नक्काशी धार्मिक मान्यताओं और प्रथाओं से जुड़ी है। लकड़ी पर  नक्काशी का कार्य उनके इतिहास जितना पुराना है तथा इसे दो मुख्य संस्थाओं सिर के शिकार और मोरुंग से जोड़ा जा सकता है। यहाँ बनाए गए लकड़ी के दरवाजे पर मानव के कपालों की नक्काशी, मिथुन (बॉस फ्रंटालिस), सूर्य और अर्धचंद्र के प्रतीक, लड़ते हुये मिथुन और स्त्री  स्तनों को चित्रित किया गया है। हालांकि सिर के आखेटन की प्रथा अब मौजूद नहीं है, लेकिन यह अतीत में उनके जीवन में एक मौलिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता था। एक योद्धा के घर के खंभों, शहतीर और गांव के द्वार तथा मोरुंग में मानव सर की उकेरी गई आकृतियाँ सम्पूर्ण नागा समूह के लिए प्रेरणा श्रोत है। अतीत में मोरुंग का महत्व सभी सामाजिक गतिविधियों के केंद्र तथा गांव के लिए गार्ड हाउस के रूप में भी रहा है। सिर के आखेट के पश्चात इसे सबसे पहले मोरुंग में लाया जाता था।  गांव के युवक यहां सोते हैं और साल भर पहरा देते हैं।

प्रेरणा का दूसरा स्रोत प्रतिष्ठा और जादू के प्रयोजनों के लिए मोरुंग को सजाने का है। लकड़ी के दरवाजे पर उच्च कुशलता से नक्काशी का कार्य किया गया है। गाँव की सुरक्षा के दृष्टिकोण से द्वार का निर्माण सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर किया जाता है। नक्काशी के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों में दाओ, कुल्हाड़ी, छेनी और लकड़ी के हथौड़े आदि प्रमुख हैं। नागाओं के लिए सिर का शिकार न केवल समाज में सम्मान और प्रस्थिति के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है, बल्कि जीवन की सर्वोच्च आकांक्षा की पूर्ति भी है। इस दुनिया में यह वीरता, शौर्य और बलशीलता का प्रतीक है। यह दुल्हन के लिए गाँव के सबसे  अच्छे युवक का चुनाव कर सकता है। यह गाँव के नायक के साथ-साथ समाज के नेता के रूप में सम्मानित होने, अनुसरण करने और सुशोभित होने के लिए किसी की प्रतिष्ठा को ऊंचा कर सकता है। वीरता और सामाजिक-आर्थिक स्थिति दिखाने के लिए मिथुन का सिर (ओथोपी) गांव के द्वार के केंद्र में रखा गया है।

Online Exhibition Series-69
(07th October, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From Tribal Habitat open air exhibition
KHARU:  A traditional Village
Gate of Chakhesang Naga

Area: Phek, District
State: Nagaland

Nagaland is a beautiful hill state of India situated in a rugged, undulating mountainous terrain. It is inhabited by a large number of ethnic tribes, speaking different languages, having different traditions and culture, separate traditional dress code etc. but all call themselves as Nagas. Nagaland is one of the eight states in the north-eastern region of India, having 16 tribes and Chakhesang Naga is one of them.  The Chakhesang tribal people do not form a single endogamous group. Endogamy continues to be maintained at the sub tribe level. The three tribal segments- Chakhra, Khezha and Sangtam live in their respective territories, speak their own dialects and follow endogamy and other institutional principles of tribeship.

Naga wood carving is associated with religious beliefs and practices. The act of wood carving which is as old as the history of their traditional origin may be considered under two main heads connected respectively with head hunting and Morung institution. Carvings of human heads, Mithun (Bos frontalis), chickens, the symbols of sun and crescent moon, fierce fighting Mithuns and female breasts are also carved and depicted on the wooden door. Though head hunting no longer exists now, it had a fundamental cultural and religious importance in their life in the past. Carving of human heads on the beams and pillars of a warrior’s house and Morung and on the door of village gate show that headhunting was the inspiration. In the past Morung was the center of all social activities and also served as the guard house for the village. Head taken is first brought to the Morung. The village young men slept here and kept vigil throughout the year.

     The second source of inspiration is the necessity of decorating the Morung for purposes of prestige and magic. The entire work on the wooden door is done in very high relief. Carved wooden doors are made on the boundary of outside the village to ensure safety, security and stability. In order to provide a clear demarcation village gate were erected on a path at the strategic location of a Chakhesang Naga village. The main tools used for wood carving of the village gate are Dao, Axe, Chisel, Adze and wooden hammer etc. Head hunting for Nagas has been a source of inspiration not only for honor and status in society, but also a fulfilment of life’s highest aspiration in this world. It is associated with valour, chivalry and manhood. It could secure the best damsel in the village for a bride. It could carve out one’s stature as the hero of the village as well as the leader of the society to be respected, to be followed and to be adorned. Mithun’s head (Othopi) is placed on the center of the village gate for showing bravery and socio-economic status.