ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-70

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -70
(14 अक्टूबर
2021)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

जनजातीय मुक्ताकाश प्रदर्शनी क्षेत्र से
गाड़ी: एक पारंपरिक बैलगाड़ी,
गड़ोलिया लोहार, राजस्थान

गाड़ी -गड़ोलिया लोहार समुदाय की पारंपरिक बैलगाड़ी है। गड़ोलिया लोहार घुमंतु समुदाय है और मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी महाराष्ट्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं। ये पारंपरिक रूप से तय मार्ग पर एक से दूसरे गांव आते जाते रहते हैं। इस समुदाय में गाड़ी एक परिवार के लिए उनका आवास भी है, जिसमें उनके जीवन यापन के लिए आवश्यक सभी वस्तुएं होती हैं। यह कुछ दिनों के लिए एक गाँव में डेरा डालते हैं और इस दौरान न केवल नए औजार बनाते हैं, बल्कि ग्रामीणों के लोहे के पुराने औजारों की मरम्मत भी करते हैं।

गाडोलिया लोहार की बैलगाड़ी अन्य ग्रामीणों की बैलगाड़ी की तुलना में भारी और मजबूत होती है। इसके निर्माणक तत्व “थालिया” व “पीचला” में निहित होते हैं। “थालिया” गाड़ी के अगले भाग में एक बड़ी और तिकोनी आलमारीनुमा संरचना होती है, जो लकड़ी के तख्तों से सभी तरफ से ढकी होती है। इसके पीछे की तरफ एक छोटा दरवाजा होता है। “पीचला” अर्थात गाड़ी के मध्य और पीछे का भाग एक बड़ा घनाकार कक्ष होता है जो ऊपर से खुले और एक दूसरे से जुड़े तीन दीवारों से घिरा होता है जिससे कि उसमें रखी वस्तुएं बाहर ना गिरे। लोहे व पीतल के टोपीदार कीले लगाकर गाड़ी को सजाया जाता है। शहरो में पहले इन्हे बाहरी व्यक्ति माना जाता था परन्तु धीरे – धीरे ये लोग सामान्य परिदृश्य में मिल गये। आज इन्होंने अपनी मूल्यवान परम्परा, लोक साहित्य व जीवन पद्धति को सुरक्षित रखा है। इस प्रादर्श का संकलन 1984 में संग्रहालय द्वारा किया गया था, जिसे संग्रहालय के जनजातीय आवास मुताकांश प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है।

Online Exhibition Series-70
(14th October, 2021)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

From Tribal Habitat open air exhibition
GADI- A Traditional Bullock Cart of Gadoliya Lohar, Rajasthan

Gadi is a traditional bullock cart of Gadoliya Lohar community. They are mainly found in Rajasthan, Gujarat, Madhya Pradesh, Punjab, Haryana, Western Maharashtra and Western Uttar Pradesh. Gadoliya Lohars are nomadic blacksmith and move from one village to another on a traditionally fixed route. The Gadi also forms an abode for a Gadoliya Lohar family which contains all the possessions and necessities required for their living. Usually they camp in a village for few days during which they make not only new implements but also mend old iron implements of the villagers.

The Gadoliya Lohar bullock cart is heavier and sturdier than the usual village bullock cart. The typical construction lies in its “Thalia” and the “Peechla”. The “Thalia” is a sufficiently large, triangular-shaped cup-board, covered on all sides with wooden planks and having a small door at the back side. It forms the front portion of the cart. The “Peechla”, i.e. the middle and rear portion of the cart is a large cubical structure. It is open from above and is surrounded by three walls adjacent to each other which prevent the things from falling off. The cart is decorated with iron and brass-capped nails. Earlier in the cities, they were considered strangers, but gradually these people started mingling with the mainstream population. Even today, they have been able to preserve their valuable tradition, folk literature and way of life. This exhibit was collected in the year 1984, and it is displayed in the Tribal Habitat open air exhibition premises of the Museum.