ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-8

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-8

मोरुंग – कोन्यक नागा का युवागृह

नागा समुदायों में कोन्यक नागा एक प्रमुख समुदाय है जो मुख्यतः नागालैंड के मोन जिले में उष्णकटिबंधीय वन क्षेत्र में संकेंद्रित है। राज्य की उत्तरी सीमा पर स्थित पर्वतीय इलाके और घने जंगलों से आच्छादित यह क्षेत्र पूर्व में म्यांमार और उत्तर में भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के साथ अपनी सीमा को साझा करता है।

नागा जनजाति की सबसे प्रमुख सांस्कृतिक पहचान युवागृह है, जो एक गाँव या एक समुदाय की समृद्धि के लिए आवश्यक सामाजिक मूल्यों, नैतिकता, वैवाहिक कानूनों और वीरोचित उपलब्धियों को सिखाने में सक्रिय भूमिका निभाता है। यद्यपि, नागा युवागृह को सामान्यत: मोरुंग कहा जाता है तथापि विशिष्ट सांस्कृतिक जनसमूह के आधार पर इसके कई अन्य स्थानीय नाम भी हैं। कोन्यक नागा अपने मोरुंग को “पान” कहना पसंद करते हैं। एक गाँव में रणनीतिक स्थिति और “खेल” कहलाने वाली गलियों में गाँव के भौगोलिक विभाजन के आधार पर एक से अधिक युवागृह हो सकते हैं तथा यह मुख्य रूप से सुरक्षा चौकी  के रूप में कार्य करते हैं। एक युवागृह के सदस्यों में एक से अधिक गोत्र के लोग शामिल हो सकते हैं और उनका प्रबंधन मोरुंग के वरिष्ठ सदस्यों और स्वयंसेवकों की एक परिषद द्वारा पूर्ण स्वायत्तता के साथ किया जाता है।

कोन्यक नागा मोरुंग दीर्घ गोलाकार होता है तथा इसका प्रवेश द्वार काफी खुला होता है। वास्तव में इसका ग्राउंड प्लान यू (U) आकार का होता है। मोरंग के आसपास का क्षेत्र अनुष्ठानिक क्रियाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक केंद्र होता है, विशेष रूप से जहां यह मानशम नामक लॉग-ड्रम से संबंधित हो। मोरुंग का निर्माण बसाहट की सबसे ऊंची जगह पर आम तौर पर एक खड़ी ढलान के किनारे किया जाता है। यह सदस्यों को अपने गाँव को दुश्मनों के अचानक छापे और हमलों से बचाने के लिए निगरानी करने में सक्षम बनाता है। शिरोच्छेदन प्रथाओं, उर्वरता पंथ, वीरता, टोटम और बलिदानों के प्रतीकों आदि की अभिव्यक्तियों को मोरुंग के खंबे और क्रॉस बीम पर विस्तृत रूप से उकेरे गए रूपांकनों में देखा जा सकता है।

मोरुंग के निर्माण में लकड़ी के लट्ठो, बांस एवं “यीउह” के पत्ते (ताड़ के पत्ते) इस्तेमाल किए जाते हैं। ग्राउंड प्लान में पत्थरों के ब्लॉकों का उपयोग किया जाता है जहां से कम ऊंचाई की बांस की रेलिंग तथा चटाई की दीवाल खड़ी की जाती है। मोरुंग की छत में दो तरफा ढलान है जो सामने से दीर्घ वृत्ताकार है और इसे ताड़ के पत्तों से छाया गया है। ताड़ की मोड़ी गई पत्तियों की एक के ऊपर एक सतह बनाकर बांस या बेंत की रस्सी से छप्पर पर बांधा जाता है। यह मोटा छप्पर (नोकटोक) इस आश्रय का सबसे प्रभावी पहलू है जो बिना किसी बाधा के बारिश के पानी को बाहर निकाल देता है। बांस की चटाइयों की दीवारें मानसूनी वर्षा और वसंत की तेज हवाओं से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

मोरूंग की सामने की दीर्घ गोलाकार दीवार अन्य तीन दीवारों की तुलना में आकर्षक होती है। यह पूरी तरह से छोटे बांस या लकड़ी के खंभों की बनी होती है, जिन्हें जमीन में गाड़ा जाता है और बाँस की रस्सियों से बांध दिया जाता है। इस खुले प्रवेश द्वार पर क्षैतिज रूप से एकल लकड़ी के एक बड़े लॉग को रखा जाता है, जिसे “खाओ” कहा जाता है। यह कोन्यक मोरुंग को एक आकर्षक रूप प्रदान करता है। 12 से 14 वर्ष की आयु प्राप्त करते ही युवक मोरुंग में सोना शुरू कर देते हैं। जो युवा मोरुंग के प्रवेश द्वार से एक ही छलांग में “खाओ” पार कर सकते हैं उन्हें रात में मोरुंग में सोने की पात्रता मिल जाती है।

कोन्यक नागा मोरुंग की महत्वपूर्ण विशेषता सेंट्रल पोस्ट “अचुंग शॉन्ग” तथा उसके साथ की लकड़ी की नक्काशीदार संरचनाएं हैं। उनमें उर्वरता की  अवधारणा से संबंधित सार्थक रूपांकन हैं। इस सेंट्रल पोस्ट के ऊपर लकड़ी की नक्काशीदार क्रास-बीम “पान्गपाई” क्षैतिज रूप से रखी गई है और बगल के खंभों “ताथ्रम शॉन्ग” पर टिकी हुई है। सामने की ओर के अन्य खंभों को “अपोई शॉन्ग” के रूप में जाना जाता है।

मोरुंग के अंदर युवकों के लिए सोने का कमरा “ज़ोई” है। सदस्यों की संख्या के अनुसार कमरे का आकार भिन्न होता है। मोरुंग के सदस्यों से मिलने आने वाले लोगों के बैठने के लिए सामने की तरफ “वाकम” नामक संरचना बनाई जाती है। वृद्ध लोग आम तौर पर अवकाश के समय वाकम पर बैठ कर समूह गीत गाते हैं। चूल्हे के चारों ओर तथा “जोई” के अंदर चटाइयों से बने बिस्तर रात में सोने के लिए युवाओं को निजता प्रदान करते हैं।

लॉग ड्रम एक ही पेड़ से बना एक विशाल गोंग है। अंदर से खोखला किया गया यह वाद्य यंत्र दूर से एक नाव की तरह प्रतीत होता है और लगभग 26 फीट लंबा है। कोन्यक इस ड्रम को लकड़ी के मोटे डंडों  “शम्मो” से बजाते हैं। लॉग ड्रम को लकड़ी की डंडों से निरंतर बजा कर विभिन्न लयबद्ध ध्वनियाँ निकाली जाती हैं, जिनके विभिन्न अर्थ होते हैं जैसे शिरोच्छेदन में सफलता, ग्राम के मुखिया का अंतिम संस्कार, अओलिंग उत्सव के दौरान नृत्य, गाँव में आग लगने की घटना, सौर और चंद्र गृहण के समय  समारोह का आयोजन आदि की सूचना देने के लिए।

MORUNG- The Konyak Naga Youth Dormitory

The Konyak Naga is one of the dominant Naga communities largely concentrated in the tropical forest region in the Mon district of Nagaland. Situated in the extreme northern proximity of the state with a rugged mountainous terrain and thick forest cover; the region shares its international boundary with Myanmar to the east and the state of Arunachal Pradesh in the north.

One of the very dominant cultural identities of the Naga tribe is the institution of a Youth Dormitory that plays an active role to the preaching of social values, morals, marital laws and martial accomplishments required for the prosperity of a village or a community. Although, the common nomenclature of the Naga Youth Dormitory Morung, it also has its local terms and varients depending on the distinct cultural population. The Konyak Naga prefers to call their Morung as ‘Paan’. A village may consist of more than one youth dormitory depending upon strategic location and geographical distribution of the village into lanes called ‘Khel’ and it largely functions as a guardhouse of the warriors. The members of a dormitory may comprise of more than one clan and they are managed by a council of Morung elders and volunteers with full autonomy. 

The Morung of the Konyak Naga is a long elliptical form with a wide-open entrance. It can be more strictly said as U shaped in ground plan. The area around the Morung is a social center for the commencement of important rituals, especially where it is strongly associated with a log-drum called ‘Mansham’. The Morung is generally built on the edge of a steep slope to the highest altitude of the settlement area. It enables the members to watch and protect their village from sudden raids and attacks of the enemies. Expressions of their headhunting practices, fertility cult, the symbol of valour, totem and sacrifices, etc. could be noticed from the motifs elaborately carved on the poles and cross beams of the Morung.

The materials used in the construction of Morung are wooden logs, bamboos, ‘Yeauh’ leaves (palm leaves), and stone slabs. Stone blocks are used in the ground plan from which the low height bamboo matting is erected to touch the roof slopes. The roof of the Morung is sloped on the two sides and forms semi-circle in front and is thatched with palm leaves. Folded palm leaves are layered and secured with bamboo or cane-twisted cords to the ceiling framework. The thick and shaggy palm-thatched roof “noktok” is the most dominating aspect of the shelter. It easefully drains out the rainwater very quickly. The large overhangs and two-sided thatch protect the light; woven bamboo lattice walls help to protect from the constant monsoon and also restrain the strong early spring wind.

Traditionally, stone blocks are placed to a certain height for making the lower portions of the side and front wall. The circular front wall of the Morung is fancier than the other three walls. It is entirely made of bamboo or timber poles of low height embedded in the ground and tied with bamboo splits. This elliptical form of a wide-open entrance is horizontally placed with a magnificent piece of single wood log called Khao gives a fancy look to the Konyak Morung. The male youth, when attaining the age of 12-14 years, starts sleeping in the Morung. Those who can cross the Khao (a wooden log) from the entrance of the Morung in one jump get eligibility to sleep inside the Morung at night.

The important feature of the Konyak Naga Morung is the central post “Achung Shong” and it’s supporting wooden carved structures. They carry meaningful motifs related to their concept of fertility. Along this central post, profusely carved cross-beam of wooden plank “Pangpai” runs horizontally and rests on side post called “Tathram shong”. Other elementary posts erected to the front side are known as “Apoi shong”.

‘Zoi’ is the sleeping room for the Konyak youths, made inside the Morung having some bamboo made cot “Lakho” and wooden cot “Pinkho”  inside the room. The size of the room varies according to the number of members. “Wakam” is the sitting platform made in the vicinity for the people who visit them. Older people generally sit in the “Wakam” during the leisure period and sing in the chorus. Bamboo-matted sleeping beds around the fireplace the “Zoi” provides privacy to the youths for sleeping at night.

Log drum is a huge gong made out of a single tree. This hollowed out drum like instrument appears like a boat from the distance and it is about 26 ft. in length. The Konyak Naga people beat the drum with the help of wooden clubs known as “Shammo”. The continuous beating of the log drum yields various rhythmic sounds indicating the different purposes of its utilization. These rhythms give a symbolic representation of various significant events like the success in headhunting, observance of funeral rites of the village chief, dancing during the “Aoling” festival, to give alarm of fire incidence in the village and also for ceremonial conduct during the solar and lunar eclipse.

A Konyak Naga oldman
A view of the Konyak Naga habitat, Nagaland
Morung at the Lamtok village, Mon District, Nagaland
Log drum of Konyak Naga in Lamtok village, Mon District Nagaland
Morung installed as an exhibit in the open air exhibition of the IGRMS
Konyak Naga constructing Morung at IGRMS
Celebration after successful installation of Morung at IGRMS
Konyak Naga demonstrating the rhythmic beats of Log Drum in the Museum
A Konyak Naga man displaying the tools and possession in the Morung of IGRMS
Artist with museum officials after the installation of Morung at IGRMS
Video on MORUNG- The Konyak Naga Youth Dormitory