कुम्हारपारा – Kumharpara -पश्चिम बंगाल की कुम्हारी एवं टेराकोटा परंपरा-POTTERY AND TERRACOTTA TRADITION OF WEST BENGAL

पश्चिम बंगाल की कुम्हारी एवं टेराकोटा परंपरा
क्षेत्र: पंचमुडा
जिला: बांकुरा
राज्यः पश्चिम बंगाल

बांकुरा बिष्णुपुर तथा जिले के कई अन्य स्थानों में टेराकोटा मंदिरों के लिए जाना जाता है। सदियों से इस क्षेत्र के कारीगरों विशेषकर कुम्हारों ने मिलकर इस कला का विकास किया है। टेराकोटा रचना की बंकुरा शैली में ‘बांकुरा अश्व‘ सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। ये पंचमुड़ा गांव के कुंभहार (कुम्हार) ही है जिन्होंने सबसे पहले ये बंकुरा अश्व बनाना प्रारंभ किया था। शुरू में ये घोड़े केवल अनुष्ठाणिक उद्देश्य के लिए बनते थे| ये डिजायन में सादा थे तथा लोक देवी-देवताओं जैसे धर्म ठाकुर, मनसा देवी एंव ग्राम देवताओं को अर्पित किए जाते थे। बाद में इन्होंने अति सजावटी अश्वों का निर्माण प्रारम्भ कर दिया। जिन्होने बंकुरा कुम्हारों को प्रसिद्धि दिलाई। इस क्षेत्र के कुंभकारों द्वारा अश्वों के अतिरिक्त अन्य टेराकोटा प्रादर्श जैसे पशु आकृति, उत्सवी मृदभांड,  टेराकोटा के कवेलू,  देवी-देवताओं की मूर्ति, घरेलू उपयोग की वस्तुएं एवं पूजा पाठ के धार्मिक मृदभांड जैसे दीप, धूपदान इत्यादि के साथ सर्पदेवी मनसा चाली या झार अर्थात निवास स्थल/मंदिर, विभिन्न कलात्मक आकृतियां, बोंगा हाथी इत्यादि भी बनाए जाते है।

POTTERY AND TERRACOTTA TRADITION OF WEST BENGAL
Area: Panchmura
District: Bankura
State: West Bengal

Bankura is well known for its terracotta temples of Bishnupur and many other places in the district. For centuries together with the artisans especially the kumbhakars of this area have developed this art. The most famous of Bankura style of terracotta creation is the ‘Bankura horse’. It is the Kumbhakar (potter) of Panchmura village, who started to make the famous Bankura horse. Initially, the horses were made for ritual purposes. These were simple in design and made as offerings to the folk deities like Dharma Thakur, Manasa and village deities. Later they started producing highly decorative horses which earned great fame for the Bankura potters. Besides horses, other terracotta objects are also produced by the Kumbhakar of this region such as animal figurines, ceremonial pottery, terracotta tiles, figurines of divinities, objects of household and temple worship like religious earthenware, lamps, incense burners, the shrine of snake goddess Manasa chali or jhar, the abode of Manasa various artistic figures, Bonga Hati etc.