ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-9

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – 9

मिथक वीथी मुक्ताकाश प्रदर्शनी से – मेक्किकट्टू

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

मेक्किकट्टू -भूता मूर्तियों का स्थान:

प्राचीन होने के साथ-साथ मिथक प्रत्येक संस्कृति में आये उतार-चढ़ाव, बदलाव तथा उसकी जीवन दृष्टि की अनुगूँजों को अपने में बीज के रुप में संजोये रहते हैं और इसीलिये किसी भी संस्कृति को समझने के लिये उसके मिथकों को जानना व समझना आवश्यक है। यह प्रदर्शनी इस संदर्भ में मानव संग्रहालय का एक सार्थक उपक्रम है।

इस प्रदर्शनी में मिथकों, किंवदंतियों और कहानियों को द्वि-आयामी एवं त्रि-आयामी रूपों में दर्शाया गया है जो आदिवासी व लोक कलाकारों द्वारा अपने तरीके से खींची गई हैं। इन्हें अलग- अलग माध्यमों जैसे मिट्टी, टेराकोटा, पत्थर,पीतल, लकड़ी, लोहा, आदि से तैयार किया जाता है। विभिन्न कारीगर समूहों के शिल्प, लोक देवताओं और पारंपरिक चित्रों की अभिव्यक्ति इस अनूठी प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण है। वर्तमान में इस प्रदर्शनी में चालीस प्रादर्श संकुल तैयार किये गये है जो आदिवासी तथा लोक मिथकों, अनुष्ठानों और मान्यताओं पर आधारित है।


मेक्किकट्टू वह स्थान होता है जहां भूतों (आत्माओं) का प्रतिनिधित्व करने वाली मूर्तियों को एक निर्दिष्ट स्थान पर एकत्रित किया जाता है। भूता पंथ को ईश्वरीय आत्माओं व उपदेवताओं के रूप में माना जाता है। जैसा कि आत्माओं में अनिष्टकारी और परोपकारी दोनों पहलू होते हैं और माना जाता है कि वे मानव स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता एवं भाग्य, भूमि और मवेशियों पर अधिकार रखते हैं, उनका प्रचार होना चाहिए। प्रत्येक आत्मा का अपना रूप, पौराणिक इतिहास, विशेष शक्तियाँ और भविष्यवाणियाँ होती हैं

मूलरूप से मेक्किकट्टू कर्नाटक के उडुपी जिले में एक छोटी सी जगह है। जिसे मुख्य रूप से भगवान शिव के वाहन नंदिकेश्वर के स्थान के रूप में जाना जाता है। इसमें कई तरह की लकड़ी की मूर्तियॉ है जो कि वैदिक देव-समूह, दिव्य पुरुषों एवं स्त्रियों की है। कई पौराणिक प्रसंग और मौखिक परम्पराएँ हैं जो मेक्किकट्टू की आत्माओं के चमत्कार को दर्शाती हैं। दक्षिण कन्नड़ और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में बसे सभी जाति समूह के बीच भूता पंथ की व्यापक रूप से पूजा की जाती है। मानव संग्रहालय के मेक्किकट्ट में 41 लकड़ी की मूर्तियॉ शामिल हैं जिन्हें 2008 और 2010 में उडुपी, कर्नाटक के क्षेत्रीय दौरे के दौरान अधिग्रहित किया गया जो कि संग्रहालय के संग्रह का हिस्सा बना। लेकिन वर्ष 2017 में यह लकड़ी की मूर्तियॉ मिथक वीथी मुक्ताकाश प्रदर्शनी में स्थापित की गयी। जिसमें पुरुष और महिला आकृतियॉ, पशु आकृतियॉ जैसे बैल (एकल और बहु-सिर वाले), बाघ, सूअर, घोड़े, बंदर, बकरे एवं पक्षी आकृतियॉ और संयुक्त आकृतियॉ शामिल हैं।

लकड़ी की मूर्तियों को गुडीगर समुदाय द्वारा तैयार किया जाता है एवं माना जाता है कि यह समुदाय काफी समय पहलेगोवा से पलायन कर कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में बस गया। इन मूर्तियों को कटहल की लकड़ी से बनाया जाता है। और उनके चमकीले लाल, पीले और काले रंग इसकी विशेषता है जिन्हें मूलरूप से प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किया जाता है। हालांकि आजकल प्राकृतिक रंगों की जगह सिंथेटिक रंगों का प्रयोग किया जा रहा है।

अलंकृत नक्काशीदार लकड़ी की मूर्तियों के अलावा, भूतों का प्रतिनिधित्व कच्चे पत्थर, धातु के मुखौटे और अनुष्ठानिकवस्तुओं द्वारा भी किया जाता है। आत्मा की पूजा अक्सर एक मूर्ति के साथ नहीं की जाती है लेकिन इसमें कई तरह के कार्यों और अनुष्ठानों के शानदार प्रभाव शामिल होते है, जिसमें लोक महाकाव्य या गाथा गाते हैं, जिन्हें पड्डन (आत्माओंपर कथात्मक गीत) कहा जाता है, आत्माओं के वश में आए पुजारियों द्वारा किये गए नृत्य, भव्य परिधान और मुखौटे पहनना, चमत्कार और वीरतापूर्ण प्रदर्शन करना, दिव्य भावना का संदेश देना और बीमारी के समय में गांव के विवादों को निपटाना आदि शामिल है।

Online Exhibition Series-9

From Open Air Exhibition Mythological Trail: Mekkikattu

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

Mekkikattu (The shrine of Bhutta idols)

Mythology, besides being the ancient cousin of the culture, is also the curious chronicler of its highs and lows, its changing prospects and world views and preserves it all insight as a seed. It follows from here that a basic understanding of myths is expedient to the desire of knowing a culture. The exhibition is a step true to the initial aspiration of IGRMS.

In this exhibition myths, legends and stories are depicted in 2D and 3D forms, drawn by the tribal and folk artists in their own way.These are crafted through different media like clay, terracotta, stone, brass, wood, iron, etc. Crafts of various artisan groups, manifestation of folk deities and traditional paintings form the main attraction of this unique exhibition. The exhibition at present created forty such spaces pertaining to the tribal and folk myths, rituals and beliefs.

Mekkikattu is regarded to be the place where idols representing bhuttas (the spirits) are congregated in a designated place. Bhutta cults are considered as the ethereal spirits or demi gods. As spirits have both malevolent and benevolent aspects and are believed to possess power over human health, fertility and fortune and over the land and cattle, they must be propitiated. Each spirit has its own form, mythic history, special powers and propitiatory requirements.

Originally Mekkikattu is a small hamlet in Udupi district of Karnataka mainly known as the seat of Lord Nandikesvara, the Vehicle of Lord Shiva. It houses a numerous wooden sculptures of deified male and female and divinities of Vedic pantheon.There are a number of mythological episodes and oral traditions reflecting the miracles of spirits of Mekkikattu. Bhutta cults are widely worshiped among all caste group in South Kannada and coastal areas of Karnataka. The Mekkikattu at IGRMS comprises of 41 wooden images, acquired during field tour in 2008 and 2010 from Udupi, Karnataka and became part of IGRMS Reserve Collection. But the installation of these wooden idols at mythological trail open air exhibition was made in the year 2017. Human figures of male and female; animal figures of bull (single-headed and multi-headed), tiger, boar, horse, monkey, ram; bird figures and composite figures are installed.

The idols are crafted by Gudigars, a community of wood carver believed to be migrated from Goa and settled in the coastal Karnataka region long ago.These idols are made out of jackfruit wood and are characterised by their bright red, yellow and black colour that were originally obtained from natural sources. Today however natural pigments are replaced by synthetic colour.

Apart from ornately carved wooden sculptures, the Bhuttas are also represented by crude stone, metal masks and ritual objects. Spirit worship is not often conducted with an icon but involves a number of actions and rituals of spectacular effects singing folk epics or ballads called Paddanas (narrative songs on spirits), dancing by priest-impersonators possessed by spirits, wearing gorgeous costumes and masks, performing miracles and heroic feats and delivering message of divine spirit, during the time of disease and settling village disputes etc.


The Manasa Myth at Mythological Trail exhibition, IGRMS
The Gond Origin Myth at Mythological Trail Exhibition, IGRMS
The myth and ritual of Gangaur at Mythological Trail Exhibition, IGRMS
The shrine of Mekkikattu at Mythological Trail exhibition, IGRMS
Wooden idols of minor divinities and spirits in Mekkikattu shrine at Mythological Trail exhibition, IGRMS
Ritual performances by artists during installation of Bhutta idols at Mythological Trail exhibition, IGRMS
wooden image of Mother goddess riding a five headed bull of Makikattu at Mythological Trail exhibition, IGRMS
Image of Bobbarya in Mekkikattu shrine at Mythological Trail exhibition, IGRMS
Varieties of Animal figures in Makkikattu Shrine at Mythological Trail exhibition, IGRMS
Introductory video on Makkikattu Shrine at Mythological Trail exhibition, IGRMS

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