चुंडन वल्लम (सर्प नौका) – Chundan Vallam (Snake Boat)

पल्ली-ओडम/चुंन वल्लम (सर्प नौका)

110 फीट (33.85 मीटर) लंबी स्नेक बोट, जिसने केरल में लगभग दस दशकों तक वार्षिक वल्लम-कली (नौका उत्सव) में भाग लिया, को संग्रहालय के लिए वर्ष 1991 में अधिग्रहित किया गया था। इतनी बड़ी सर्प-नौका न इसके पहले कभी केरल से बाहर गई, न बाद में। इसके आकार, पवित्र चरित्र और सामुदायिक आराधना के लिए इसे इंगांरामासं के संग्रह में एक बेशकीमती वस्तु माना जाता है। नाव को पहले पथनमथिट्टा जिले के पूवाथूर गाँव के लोगों द्वारा उच्च सम्मान के प्रतीक और सामुदायिक संपत्ति के रूप में संभालकर रखा गया था। यह नाव, जिसने कई दौड़ जीती, को 1960 में अरनमुला में एक वार्षिक नौका उत्सव के दौरान मुख्य अतिथि भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने सम्मानित भी किया था। इस नाव ने उस विशेष वर्ष में भी प्रतियोगिता जीती थी और पं. नेहरू ने कुछ समय के लिए उसमें सवारी भी की। बाद में पं. नेहरू के सम्मान में, केरल सरकार ने एलेप्पी जिले (केरल) के पुन्नमदा बैकवाटर में नेहरू ट्रॉफी वार्षिक नौका दौड़ शुरू की।

            केरल के नदी क्षेत्र और बैकवाटर में वार्षिक नाव उत्सव रमणीय और उत्साहवर्धक कार्यक्रम हैं, कई सर्प-नौकाओं को आलीशान मार्च के लिए रंगीन अलंकरण से सजाया  और प्रत्येक नाव को सैकड़ों नाविकों द्वारा पारंपरिक लोकगीतों की एक लयबद्ध समूह गान के साथ शानदार ढंग से संचालित किया जाता है।

            अरनमुला वल्लम-कोली, एक सदियों पुराना कार्यक्रम, हर साल चिंगम (अगस्त-सितंबर महीने) के उत्तरतादि दिवस पर आयोजित किया जाता है। इस शुभ दिन पर, अरनमुला में पवित्र नदी पंपा के दोनों किनारों पर हजारों लोग सर्प नौकाओं का स्वागत करने के लिए इकट्ठा होते हैं। नदी के किनारे तब आनंदमय और शोरगुल से भरपूर हो जाते हैं और सभी की निगाहें भगवान कृष्ण के आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए पम्पा के तट पर स्थित पार्थसारथी मंदिर की ओर जाने वाली असंख्य सर्प नौकाओं की ओर उत्सुकता से देखती रहती हैं। यही से पारंपरिक अरनमुला वल्लम-काली की शुरुआत होती है। सभी प्रतिभागी नौकाओं की एक साथ शानदार परेड के बाद, दिए गए स्थान पर कई पारियों में नौका प्रतियोगिता का आयोजन शुरू होता है। भाग लेने वाली नावें अलग-अलग करस (बस्तियों) से संबंधित होती हैं और पूरे एक वर्ष के लिए इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को अपने गांव ले जाने के लिए प्रत्येक नाव में सवार-पुरुष प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए एक साथ अपनी वीरता दिखाते हैं। यह इस वर्ष की विजेता-बस्ती के लिए गर्व की बात होती है।

जी.जयप्रकाशन, आईजीआरएमएस न्यूज, पल्ली-ओडम/चुंडनवल्लम/सर्पनौका, वॉल्यूम-1,  नंबर-3, जुलाई, 2004.

Palli-Odam/Chundan Vallam (Snake Boat)

The 110 ft. (33.85m) long snake boat, which participated in the annual Vallam-Kali (boat festivals) for nearly ten decades in Kerala, was acquired for the museum by in the year 1991. Such a large snake-boat has never travelled outside Kerala before, nor after. It is considered to be a prized object in IGRMS display for its size, sacred character and community adoration. The boat was earlier maintained as a community property, as a symbol of high esteem, by the villagers of Poovathoor in Pathanamthitta district. The boat, which won several races, was said to be blessed by the then Prime Minister of India Pt. Jawaharlal Nehru during one of the annual boat festivals in Aranmula where he was the chief guest for the occasion, in the 1960s. It won the Boat-race for that particular year also, and Pt. Nehru ferried in it for a while. Later, in honour of Pt. Nehru, the government of Kerala began the Nehru Trophy annual boat race, in the Punnamada backwaters of Alleppy district (Kerala).

            The annual boat festivals in the river basins and backwater streams of Kerala are delightful and pleasant events, for the stately march of numerous snake-boats, decorated with colourful ornamentation, and driven majestically by hundreds of oars-men in each of the boats with rhythmic chorus of traditional folksongs.

            The Aranmula Vallam-Kaoli, an age-old event, is organized every year on the Uthrattadi day of Chingam (August-September month). Thousands of people assemble on both the banks of Pampa, a sacred river in Aranmula, on this auspicious day, to welcome the racing snake boats. The riversides then become gay and noisy. And all eyes converge eagerly to the numerous snake boats driven towards the Parthasarathy temple, situated on the shore of Pampa, for receiving blessings of Lord Krishna. This marks the beginning of the traditional Aranmula Vallam-kali. After a spectacular parade of all participating boats together, the event of racing competition begins in several batches at the given spot. The participating boats would belong to different Karas (hamlets) and the oar-men in each boat would together show their valor in reaching first in the race; to take the coveted Trophy to their hamlet for a year. It would be a pride for the winner-hamlet for that year.

G. Jayaprakashan, IGRMS NEWS, Palli-Odam/Chundan Vallam/ Snake Boat, Vol .1, No.03, July, 2004.