भाथी – Bhathi

’’भाथी’’

(एक पारम्परिक धोंकनी)

समुदाय : लोहार

ग्राम : कसरा बोखार

जिलाः मधुबनी

राज्यः बिहार

      ‘‘भाथी‘‘ एक पारम्परिक धोकनी है जिसको जमीन में गड्ढा खोदकर बनाते है। यह पशु के चमड़े को धोकनी की गर्दन पर पत्ती के आकार में तीन स्‍तरों पर लपेटकर निर्मित है। इसका अग्र भाग एक लोहे की नली से जुड़ा होता है जो भट्टी में खुलता है। इसका पिछला भाग एक लोहे की नली जो भट्टी में खुलती है से जुड़ा होता है। कार्य विधि संचालन के दौरान कड़ी को ऊपर की तरफ बांस की छड़ी के माध्यम से खींचा जाता है जोकि हवा के अंदर तक जाने एवं आग को जलाये रखने में सहायक है। जव चेन को ढीला छोड़ दिया जाता है तो भट्टी के अंदर लोहे की नली के द्वारा हवा अंदर तक प्रवेश करती है तथा चारकोल को जलाने में सहयोग करती है। चारकोल की आग में लोहा गर्म होता जिसको लोहे की निहाई पर रखकर हथौड़े की सहायता से पीटकर उद्देशानुसार आकार दिया जाता है। यह परम्‍परा मधुबनी बिहार के ठाकुर (लोहार) समुदाय में आज भी चलन में है। 

“Bhathi”

(A traditional bellow)

Community : Thakur (Lohar)

Village: Kasra Bokhar

District: Madhubani

State: Bihar

     “Bhathi” a traditional air bellow which is mostly made by digging a pit in the earth.  This is made of animal hide, shaped as a leaf by binding around the rim of the bellow in three steps. The frontal portion of the bellow is fitted with an iron pipe which opens into the furnace. The rear portion of the bellow is fitted with an iron chain on the lower side. During operation the chain is pulled upward which allow the bellow to spread and the air passes inside. When the pulled chain is allowed to loose, the air inside the bellow passes to the furnace through the iron pipe, which help the charcoal to fire. The iron is fired in the furnace and given a proper shape of an object as required by beating the hot iron on the “Nehai”. This tradition is still in practice and prevalent among Thakur (Lohar) of Madhubani in Bihar.