गन्ना चरखी-Ganna Charkhi

’’गन्ना चरखी’’

(गन्ना रस निकालने का पारम्परिक उपकरण)

समुदाय : लोक

जिला : बस्तर

राज्य : छत्तीसगढ़

गन्ना चरखी लकड़ी के दो बेलनाकार तनों से निर्मित एक पारम्परिक उपकरण है। सामान्यतः छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण अंचलों में गन्नें का रस निकालने के लिये लोहे से बनी चर्खियां उपयोग में लाई जाती हैं किन्तु बस्तर जिला के चित्रकूट नामक ग्राम से संकलित यह चरखी इस मायने में विशेष है कि यह पूर्णतः लकड़़ी से निर्मित है। किन्तु इसकी रचना और प्रकार्य विधि लोहे की बनी चरखी जैसी ही है।

इस चरखी का मुख्य भाग लकड़ी की दो बेलनाकार संरचना से बना है इनके मध्य में दांतेदार खांचे बने हुऐ है। इनके बीच गन्ने को लगाने पर गन्ने का रस निकलता है जो नालीयुक्त आधार से प्रवाहित होकर सामने नीचे की ओर जमीन में स्‍थापित की गई मिट्टी की हांडी में संकलित किया जाता है। इसे चलाने के लिये एक बेलनाकार भाग से जुड़ी लंबी लकड़ी लगी रहती है जिसमें जुऐं के द्वारा बैल जोत दिया जाता है। बैल चरखी के बाहरी ओर परिधि में गोल गोल घूमता है।

“Ganna Charkhi”

(A traditional device for extracting sugarcane juice)

Community : Folk

District: Bastar

State: Chhattisgarh

          A sugarcane crusher is traditional wooden equipment made of two cylindrical parts. Generally, in the rural areas of Chhattisgarh state, iron –made sugarcane crusher are used to extract sugarcane juice, but this winch, compiled from a village named Chitrakoot of Bastar district, is special in the sense that it is completely made of wood. But its construction and working method is similar to that of a pulley made of iron.  

          The main part of the sugarcane crusher is made of two cylindrical wooden logs; in the middle of the crusher it has spiked grooves. When sugarcane is placed between them, juice comes out under crushing it flows down through the grooved base and is collected in an earthen pot installed in the ground. To run it, a long wood is attached to a cylindrical part, in which the ox is powered by the yoke. The ox rotates round the outside of the device and around in circular motion.  It is a purely a traditional method of crushing sugarcane.