ढेंकी- Dhenki

’’ढेंकी’’

(धान की भूसी निकालने का पारम्परिक उत्तोलक)

समुदाय : रजवार

जिलाः सरगुजा

राज्यः छत्तीसगढ़

मानव सभ्यता के आरंभिक दौर में चट्टान की प्राकृतिक सतह ओखली के रूप  में तथा पत्थर का टुकड़ा मूसल के रूप  में प्रयोग किया गया था। लगातार प्रयोग ने ओखली के पत्थर को खोखला करके या तत्पश्‍चात काष्ठ पिंडक के रूप में या वृक्ष के तने के भाग से बनाना तथा मूसल के रूप में वृक्ष की सीधी शाखा को उपयोग में लिया। ढेकी के नाम से ज्ञात भूंसी निकालने वाले इस हस्त संचलित उपकरण का भूसी निकालने हेतु उत्तोलक के रूप में बहुत प्रभावकारी तरीके से रूपांतरण हुआ। इस उपकरण को लाने में प्रयुक्त उत्तोलक कार्य सिद्धांत इसकी क्षमता को अत्यधिक बढ़ाता है। संस्कृति एवं सौंदर्य अभिव्यक्ति के कारण हस्त निर्मित ओखली, मूसल विभिन्न रूपों और आकारों में पूरे देश में व्यापक रूप से प्रचलित है। भूसी निकालने वाले उत्तोलक के क्रमिक विकास का प्रयोग पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, ओडिशा, आसाम, मणिपुर जैसे राज्यों के साथ-साथ देश के अन्य भागों के ग्रामीण एवं लोक आबादी के मध्य बड़े पैमाने पर किया जाता है।

      छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में रजवार समुदाय द्वारा प्रयुक्त ढेकी भूसी निकालने धान एवं अनाज को कूटने की उच्च कार्य क्षमता को प्रदर्शित करता एक उपकरण है। रजवारों के घरेलू सामानों के बीच ढेकी को ज्यादातर घरों में चूल्हे के पास रखा जाता है। तकनीक आधारित यह महत्वपूर्ण उत्तोलक महिला एवं पुरूष दोनों के द्वारा प्रयोग किया जाता है।

“Dhenki

(Husking Lever)

Community: Rajwar

District: Sarguja

State: Chhattisgarh

In the beginning of the human civilization, a natural surface of a rock was used as the mortar and a piece of stone as pestle. Constantly used and developed making of the mortar by scooped out in a stone or later a block of wood or a portion of a trunk of a tree, and the pestle used to be of a straight branch of a tree. This hand-operated device of husking is more effectively transferred to the husking lever popularly known as the Dhenki. The principle of the lever action as applied in the making of this implement enhances largely its working capability. The hand pestle and mortar are in extensive use with different forms, and sizes owing to one’s culture and a sense of their aesthetic embodiment throughout the country. The gradual development of the husking lever is widely used among the rural and folk population among the states like West Bengal, Bihar, Chhattisgarh, Jharkhand, Odisha, Assam, Manipur as well as in other parts of the country.

One such husking lever used by the Rajwar community in the Sarguja district of Chhattisgarh shows high efficacy of husking cereals and paddy.

Among the Rajwar household, the Dhenki in most of the cases is installed inside their house near the hearth. This significant technological based husking lever is used both by men and women.