17-23 अगस्त/August, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’
(17-23 अगस्त, 2020 तक)

कांस पायरी, कांसे की एक पायल

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

कांस पायरी बस्तर, छत्तीसगढ़ की बायसन हॉर्न मारिया जनजाति की महिलाओं द्वारा पैर में  आभूषण के रूप में पहने जाने वाली कांसे की एक बेलनाकार पायल है। इसे स्थानीय सुनारों अथवा धातु शिल्पी समुदायों द्वारा लॉस्ट वैक्स तकनीक से तैयार किया जाता है। बायसन  हॉर्न मारिया जनजाति अपने आभूषण पहनने और अलंकरण प्रतिमानों की समृद्ध परंपराओं, जो कि उन्हें और अधिक जीवंत और आकर्षक बनाती हैं, के लिए जानी जाती है। कांस पायरी का उपयोग मारिया महिलाओं द्वारा अपने टखनों को सजाने के साथ-साथ अपनी वैवाहिक स्थिति को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह आभूषण विवाह के समय एक पुत्री को उसकी माता से प्राप्त पारिवारिक परंपरा या विरासत की तरह माना जाता है। छोटी लड़कियों को इसे धारण करना वर्जित है जब तक की वे यौवन की वय को प्राप्त नहीं कर लेती।

ऐसा माना जाता है कि यह भारी पायजेब पहाड़ी ढलानों पर  ऊपर नीचे चढ़ने उतरने के दौरान उत्पन्न नाव से राहत देता है। विवाह के कुछ वर्षों पश्चात इसे बहुधा कुछ हल्के किस्म की पायल से बदल दिया जाता है।

बायसन हॉर्न मारिया शक्ति की आराधना में उन्हें प्रसन्न करने हेतु बायसन हॉर्न नृत्य करते हैं और महिला नर्तकियां सुंदर पहनावे और पीतल के शिराभूषण को प्रदर्शित करती हैं। इस समारोहिक नृत्य में  मांदर की लयात्मक थाप से ताल मिलाने हेतू पहने जाने वाले पहनावे में कांस पायरी एक महत्वपूर्ण अवयव है।

आरोहण क्रमांक :  85.113
जनजाति/समुदाय : बायसन हॉर्न मारिया
स्थान: बस्तर, छत्तीसगढ़
माप: लंबाई  : 15.5 सेमी;  चैड़ाई: 12 सेमी; बेलनाकार भाग की मोटाई
: 11 सेमी;
श्रेणी :’A‘ 

OBJECT OF THE WEEK
(17-23 August, 2020)

Kans Payri- A Bronze Anklet

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

Kans Payri, a solid cylindrical bronze anklet is used by the women among the Bison Horn Maria tribe of Bastar, Chhattisgarh as their foot ornament. It is made by the local goldsmith or metal cast communities through lost wax technique. The Bison Horn Maria is well known for their rich tradition of wearing ornaments and the adornment patterns of which makes them more vibrant and attractive. Kans Payri is one of the ornaments used by Maria women to decorate their ankle as well as to show their marital status. This ornament is considered to be a family heirloom received by the daughter from her mother during the wedding ceremony. Young girls are prohibited to wear it until they reach the age of puberty.

It is believed that the heavy weight anklet can provide some relief to the stress while moving up and down in the hill slopes. After attaining certain age of marriage, it is often replaced by a lighter version of anklet.

Marias perform Bison horn dance to propitiate the goddess of Shakti and the women dancers  exhibit their adornments with beautiful attires and brass head ornament. Kans Payri is an important component of adornment worn in this ceremonial dance to tune with the rhythmic beat of Mandar.

Accession No.:   85.113
Local Name –  Kans Payri- A Bronze Anklet.
Tribe/Community – Bison Horn Maria
Locality – Bastar, Chhattisgarh
Measurement  -Length -15.5cm, width- 12cm, thickness of the cylindrical part – 11cm.
Category –  ‘A’

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