धर्मागचरित्रम्-DHARMANGCHARITRAM

धर्मागचरित्रम्

कलाकार: श्री डी. वैकुण्ठम नक्काश

क्षेत्र: चेरियाल, वारंगल, आन्ध्रप्रदेश

शिवभक्त राजा धर्माांग तथा रानी धर्मावती के घर साँप ने जन्म लिया नाम रखा गया- धर्मागडु समय बीतने पर धर्मांगडु का विवाह राजकुमारी सत्यवती से कर दिया गया। उस समय के प्रचलन के अनुसार विवाह चूँकि धर्मांगडु के खड्ग के साथ किया गया था. इसीलिए सत्यवती अपने पति के स्वरूप से अनभिज्ञ थी।। सत्य सामने आने पर हठी सत्यवती टोकरी में अपने सर्परूपी पति को लेकर तीर्थ पर निकल पड़ी। आखिरकार शिव सत्यवती के तप से प्रसन्न हुए तथा धर्मगंगा (गोदावरी नदी) में डुबकी लगाते ही सर्प एक सुन्दर युवक में बदल गया। राजा-रानी को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। सत्यवती ने गोदावरी के तट से मुट्ठी भर रेत लेकर हवा में उछाली और कहा कि यदि वह सच्ची हो तो यह रेत शिवलिंग के रूप में जड़ीभूत हो जाये। धर्मपुरी गाँव में यह शिवलिंग आज भी खड़ा है तथा छूने पर आज भी इसमें से रेत खिरती है। धर्माग चरित्रम नामक यह कथा तेलंगाना क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय है तथा इसे प्रायः यक्षगान नृत्य शैली में प्रस्तुत किया जाता है।

यहाँ यह कथा नक्काशी पटम या चेरियाल चित्रशैली में निरूपित की गई है। नक्काशी पटम या चेरियाल चित्रकला के चितेरे नक्काश या नक्शी कहलाते हैं। पट तीन फीट चौड़ा तथा तीस से पचास फीट लम्बा होता है। हर जाति के लोग अपनी पुराण कथा का निरुपण इनसे करवाते हैं तथा प्रत्येक जाति के अपने अलग कथावाचक भी होते हैं।

DHARMANGCHARITRAM

Artist: Shri D. Vaikuntham

Region: Cheriyal, Warrangal, Andhra Pradesh:

In the house of the great Shivbhakt king Dharmang, queen Dharmavati gave birth to a snake who was called Dharmangdu. Come time and the prince was married to princess Satyawati. As was the practice in those days, she was married to the sword of the snake prince and hence was oblivious of his appearance. Faced with the reality of a snake-husband, the determined Satyawati put her husband in a basket and carrying it on her head set out on a pilgrimage. At last by the grace of Shiva, a dip in the Dharmganga (Godavari) river turned him into a beautiful young lad. However, the king and queen refused to believe it. Satyawati then vowed her truthfulness by tossing up a handful of the river sand and wished for it to turn to a Shivalingam. The Shivalingam stands till date in Dharampuri and it is said that even today hands touching it, brush off a little sand.

Dharmangcharitram is a popular myth in the Telangana region and is often performed in the Yakshagana style of dance. Here, however, it is painted in Nakkashipattam or the Cheriyal style as it is more commonly known as.