करमसेनी देवी की कथा व अनुष्ठान-THE RITUAL OF KARAMSENI

करमसेनी देवी की कथा व अनुष्ठान

कलाकार: श्री गोविन्द राम झारा, श्री मेम्बर झारा एवं श्रीमती रविवारी झारा

क्षेत्र: रायगढ़, छत्तीसगढ़

अगहन माह के पहले मंगलवार से सात दिन तक करमसेनी देवी का पर्व पूरा छत्तीसगढ़ मनाता है। इनका निवास करमसेनी या हलंग के वृक्ष पर माना जाता है। धरती की उर्वराशक्ति, परिवार की खुशहाली व संतान प्राप्ति के लिए इनकी बड़ी प्रतिष्ठा है। मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्म ही उसके जीवन को निर्दिष्ट करते हैं, यह बात इस कथा तथा करमा पर्व से जुड़े गीतों में लक्षित होती है। सात वणिक भाईयों की पत्नियों ने सर्वप्रथम यह पूजा की थी ताकि उनके पति सकुशल लौट आये और गाँव की धरती में ही इतनी उपज हो कि लोगों को बाहर न जाना पड़े।

पीतल में बना यह करमसेनी वृक्ष है जिसकी डगालों पर दैनिन्दिन कर्म करते लोग हैं तथा नीचे करमा उत्सव मनाते लोगों का समूह दर्शाया गया है।

THE RITUAL OF KARAMSENI

Artists: Shri Govindram Jhara, Shri Member Jhara, Smt. Ravivari Jhara.

Region Raigarh, Chhattisgarh

The week long festival of Karamsenidevi is celebrated in this region in the month of November. Inhabiting the Karamseni or Halang tree. The Goddess is worshipped for fertility of the fields and the family. Man’s good or bad deeds determine the course of his life – this is the central theme of the Karma songs sung during the festival. A legend goes that the wives of seven brothers had initiated this worship seeking safe return of their husbands and also to increase fertility of the village land so that the people may be spared the pain of leaving their homes for livelihood.

This bronze Karamseni tree made by the cire purdue or the lost wax technique depicts as canopy, people engaged in various activities of life. Underneath, is shown the celebration of the Karma festival.