ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-10

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -10

खोली-उत्तराखण्ड राज्य का पारम्परिक आवास

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

“खोली” (पारम्परिक आवास)

समुदाय -लोक समुदाय ( राजपूत )
ग्राम कोटुली जिला- अल्मोड़ा
राज्य – उत्तराखण्ड

 उत्तराखण्ड के जिला अत्मोड़ा में स्थित जागेश्वर क्षेत्र विशाल देवदार , कैल व बुरांस के वनों से घिरा है । हिमाच्छादित पहाड़ो के बीच समुद्रतल से लगभग 1870 मी० की उँचाई पर बसा यह क्षेत्र बहुरंगी संकृति को अपने आँचल में संजोय हुए हैं , या यूँ कहे अल्मोड़ा अपनी साकृतिक विरासत , हस्तकला , खानपान और देठ पहाड़ी सभ्यता व संकृति के लिए प्रसिद्ध है । दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होते हुए इस क्षेत्र तक पहुंचने का सफर बहुत ही कठिन है , यहां के लोग बहुत ही सरल व सादगी से जीवन व्यतीत करते है । 2011 की जनगणना के अनुसार इस क्षेत्र की कुल आबादी 35,513 है ।

पहाडी क्षेत्रों में निवास करने वाले इनके आवास प्रकार उपलब्ध प्रकृतिक संसाधनों जैसे पत्थर चलकड़ी के बने होते है , जिन्हें “खोली” के नाम से जाना जाता है । खोली जो कि दो मंजिला आवास है , इसके प्रथम तल मे गौशाला होती है जिसमें मवेशी गाय , भैस , बकरी जैसे पालतू पशु रहते है । जिसे ये लोग “ गोठ” कहते है तथा दूसरे तल को  “भतेर” नाम से जाना जाता है जिसमें एक शयनकक्ष ( साख ) तथा एक रसोई (चूल्हा) बनी होती है।

आवास के मुख्य द्वार को ” खोली व दो बड़ी – बड़ी खिडकियो को ” दो दरी के नाम से जाना जाता है । इनके आवास में मधुमक्खी पालने का भी स्थान बना होता है । जिसे ये लोग ” मोम का जाला ‘ कहते है तथा छत की ऊपरी भाग के लकड़ी के बने तोड़े मे छिद्र बने होते है जो चिड़ियो के रहने के लिए घोंसला होता है जिसे ये लोग “घोल” कहते है तथा आवास की दीवालो व सीढियो पर चावल को पीसकर मित्ती चित्र बनाने की प्रथा है , जिसे ऐपड़ ” कहते है ।

यहाँ के लोग सीढ़ीदार कृषि के साथ – साथ फल उत्पादन का कार्य भी करते है । धान , गहूँ , ज्वार , बाजरा , राजमा इत्यादि के अलावे अखरोट , सेव , किवी इत्यादि जैसे फलो का उत्पादन भी करते है । परिवार की बढ़ोत्तरी होने पर भूमि की उपलब्धता के आधार पर आवास के दॉये या बाँये रहने के लिए आवास का विस्तार कर लिया जाता है ।

उत्तराखण्ड राज्य से इस पारम्परिक आवास प्रकार “खोली ” का संकलन माह फरवरी , 2016 में जिला अल्मोड़ा के ग्राम कोटुली से किया गया था तथा माह सितम्बर 2016 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल की मुक्ताकप्त प्रदर्शनी हिमालय ग्राम में स्थापित किया गया तथा मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री ओ पी कोहली द्वारा उद्घाटन कर दर्शको के लिए खोला गया ।

Online Exhibition Series-10

KHOLI- Traditional house-type of Uttarakhand

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

KHOLI (A Traditional House)

Community: Rajput
Village: Kotul
District: Almora
State: Uttrakhand

The Jageshwar region, located in the district Almora of Uttarakhand, is surrounded by forests of enormous cedar, cal, and burans. The region which is nestled amidst snow-capped mountains at an elevation of about 1870 feet above sea level is blessed with vibrant culture in its zenith, or in a real sense, Almora is famous for its natural heritage, handicrafts, culinary traditions, highland civilization, and culture. The journey to reach this area through inaccessible mountain roads is very difficult; people live a simple life in this serene land. According to the 2011 census, the total population of this region is 35,513.

The house types in this hilly terrain are generally made up of available natural resources such as stone and wood, which is known as Kholi. This two-storied house has a cowshed (gaushala) on the lower floor to keep the livestock like cattle, cow, buffalo, and they called it Goth while the upper floor is known as “Bhater” consisting of a bedroom (Saakh) and a kitchen with a traditional hearth.

The main door and two large windows of the house are known as Dodari. They also reserve a space for the Beekeeping in their habitat, and they locally termed it “Mom Ka Jala” (the web of wax), and there are also holes made in the wooden top of the roof called ‘Ghol’ which is preferred to be the nest for the birds to live. As a traditional practice, they decorate the walls and steps of the house with clay art (Mitti Chitra) embodying with a paste of rice known as ‘Epad.’

The main occupation of the people here is terraced-cultivation, and they also engage in the production of fruits. Apart from paddy, wheat, jowar, millet, rajma, etc., they also produce fruits like walnuts, sev, kiwi, etc. When the number of family members increases, the house is extended to the right or left of the house, depending on the availability of land.

This traditional house-type “Kholi” from the state of Uttarakhand was collected in February 2016 from the village Kotuli in district Almora. It was translocated in the ‘Himalayan Village’ open-air exhibition premises of the Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya, Bhopal, as an exhibit in September 2016. Sri O. P Kohli, His Excellency, the then Governor of Madhya Pradesh inaugurated the exhibition and opened for the public
.

जिला अल्मोड़ा के एक गाँव काफली खान का दृश्य।
A view of a village Kafali khan, in district Almora.
कोटूली गाँव का दृश्य।
A view of Kotuli village.
सीढ़ीनुमा खेती का दृश्य।
A view of terrace cultivation.
जिला अल्मोड़ा के एक पारम्परिक आवास ” खोली ” का दृश्य ।
View of “KHOLI” a traditional house in district Almora.
नक्काशीयुक्त खिड़की ( दो-दरी ) से झाकते हुए क्वेटी गूठ गाँव के रहवासी ।
Residents of village Quati gunth peeping through the carved window ( Do – darti ).
मकान के ऊपरी भाग ” भतेर ” का दृश्य।
A view of upper part of house ” Bhater”.
नक्काशीदार लकड़ी की बनी मुख्य द्वार ” खोली”
A carved wooden made main door “KHOLI”
सीढ़ी व दीवारों  पर चावल के घोल से बने भित्ती चित्र “ऐपण”।
“Epad” a mural made of rice solution on the stairs and wall.
रम्परिक आवास ” खोली” का एक दृश्य।
A view of traditional house “Kholi”

निर्माणाधीन पारम्परिक आवास ” खोली” का एक दृश्य IGRMS भोपाल में।
A view of under construction of traditional house “Kholi” at IGRMS Bhopal
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Introductory video on the Himalayan traditional house “Kholi” at IGRMS Bhopal.

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