ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-11

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -11

‘‘मेढ़हठ कुठ्ठी‘‘ (लोहा निकालने की पारम्परिक भट्टी)

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

‘‘मेढ़हठ कुठ्ठी‘‘ (लोहा निकालने की पारम्परिक भट्टी)

जनजातीय समूह: बिरजिया जनजाति
क्षेत्र: हाणुप पाठ, विषुनपुर
जिला: गुमला
राज्य: झारखण्ड

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रंखला के अंर्तगत इस बार आपका परिचय करा रहे हैं पारम्परिक तकनीक मुक्ताकाश प्रदर्शनी में प्रदर्शित लोहा पिघलाने की भट्टी ‘‘मेढ़हठ कुठ्ठी‘‘ से।

मानव संग्रहालय ने इस प्रदर्शनी को विकसित करने के लिये भारत के विभिन्न स्थानों से पारम्परिक तकनीक से संबंधित प्रादर्श
संग्रहित करने का प्रयास किया है, जिनके माध्यम से हम दर्शकों को सरल समाजों के बौद्धिक व रचनात्मक कौषल से परिचय कराना चाहते हैं साथ ही इस तथ्य को रेखांकित कराना चाहते हैं कि, समकालीन जगत के तकनीकी वैभव में पारम्परिक तकनीक की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

‘‘मेढ़हठ कुठ्ठी‘‘ ग्राम हाणुप पाठ, जिला गुमला की बिरजिया जनजाति के द्वारा लौह अयस्क से लोहा प्राप्त करने में प्रयोग की जाने वाली एक पारम्परिक भट्टी है। बिरजिया झारखण्ड राज्य की असुर जनजाति का एक उप समूह है। वर्तमान में बिरजिया समुदाय को एक पृथक जनजाति का दर्जा प्राप्त है। बिरजिया पारम्परिक तकनीक के माध्यम से लोहा पिघलाने का कार्य करते है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य समुदाय भी जैसे- झारखण्ड के असुर, वीर असुर, सिंदुरिया असुर, व मध्य प्रदे की अगरिया जनजाति इसी तकनीक से लोहा प्राप्त करते है।

संग्रहालय में स्थापित यह बेलनाकार भट्टी पीली मिट्टी और भूसे से निर्मित है तथा इसकी ऊचाई 85 से.मी. व अधिकतम गोलाई 220 से.मी. है। भट्टी के निचले हिस्से में एक छिद्र होता है जिसमें गीली राख के सहारे वायु प्रवाह करने वाली मिट्टी की कीप स्थापित होती है। मिट्टी निर्मित कीप प्रगलन प्रक्रिया के दौरान पंखा या पारम्परिक धोकनी से आने वाली हवा को भट्टी में पहुँचाती है।

स्थानीय पहाड़ों से एकत्र किये गये लौह अयस्क को हथौड़ी की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर, पिघलाने के लिए साल (सोरिया रोबस्टा) की लकड़ी के कोयला के साथ मिलाकर भट्टी में डाला जाता है। भट्टी में आग जलाकर पंखा या धोकनी से हवा देने पर कोयला जलकर लगभग 1600°C
तापमान उत्पन्न करता है। भट्टी के निचले हिस्से में अयस्क से लोहा पिघलकर एक गड्ढे में एकत्र हो जाता है। इस तरह से प्राप्त गर्म लोहे को पास स्थित एक अन्य भट्टी की आग में पुनः गर्म कर निहायी व हथौड़े की मदद से पीटकर विभिन्न प्रकार के घरेलू व कृषि औजार तैयार किये जाते हैं। संग्रहालय में इस प्रदर्श को माह सितम्बर, 2017 में बिरजिया जनजाति के कलाकारों द्वारा स्थापित किया गया था। समय-समय पर इस पारम्परिक तकनीक के जीवन्त प्रदर्शन के कार्यक्रम भी परिसर में आयोजित किये जाते है।

Online Exhibition Series-11

“Medhhath Kuththi” (A traditional iron extracting furnace)

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

“Medhhath Kuththi” (A traditional iron extracting furnace)

Ethnic group: Birjiya Tribe
Area: Hanup Path, Vishunpur
District: Gumla
State: Jharkhand 

In this episode of online exhibition series we are introducing you to “Medhhhath Kuththi”traditional furnace for smelting iron displayed in the Traditional Technology open air exhibition.

Manav Sangrahalaya has made an effort to collect objects related to traditional technology from various parts of the country to develop this exhibition, through which we wish to tell the visitors about the intelligence and creative genius of simple societies. This is also meant to broaden the perspective of the visitor by emphasizing the fact that traditional technologies contribute an important background to the technological splendor of contemporary world.

“Medhhath Kuththi” traditional furnace for obtaining iron from ore is one of the object amongst these which was collected from the Birjiya tribe of the Hanup path village, District Gumla. Birjiya is a sub tribe of Asur tribe of Jharkhand. Now a days Birjiya also has got the status of a
separate tribe. Birjiyas use to melt the iron through traditional technology. In addition, couple of other communities like Asur, Veer Asur, Sinduria Asur, of Jharkhand and the Agaria tribe of Madhya Pradesh also obtain iron by applying the same technique.

This clay and husk made cylindrical furnace is 85 cm in height and maximum 220 cm in cylindrical shape. The hollow furnace has a hole like opening at it’s base in which a clay funnel is inserted with help of wet ash. During the process of smelting this clay funnel supply the air into the furnace coming from fan or a traditional bellow.

The ore collected from local hills is hammered in small pieces and put in the furnace along with charcoal of Sal (Shorea Robusta) wood. The Sal wood charcoal generates nearly 1600° C temperature in the furnace. The melted iron gathers in a hole in the base of furnace. Hence obtained iron is again put on heat in to another furnace nearby and beaten with the help of a hammer to make domestic and agricultural tools. This object was installed by artists of Birjiya tribe in December 2017 at IGRMS. Time to time live demonstration events of this traditional technology are also organised in the campus.

Preparing traditional furnace   
Preparing iron ore for smelting
  Performing ritual to initiate the process
  Filling the mixture of coal and iron ore  
  Firing up the furnace 
  Supply of air in furnace
Melted iron get stored in the base of furnace
  Extracting  iron from furnace
  Beating of red hot iron
Making tools

Introductory video on “Medhhath Kuththi” (A traditional iron extracting furnace) at IGRMS Traditional Technology Park Open Air Exhibition