31 अगस्त से 6 सितंबर, 2020/31st August to 6th September, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’
(31 अगस्त से 6 सितंबर, 2020)

खेखड़ा, एक काष्ठ मुखौटा

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

संपूर्ण विश्व में विभिन्न जनजातीय समुदायों द्वारा विविधता पूर्ण मुखौटों का उपयोग किया जाता है और यह अपनी अभिव्यक्ति की क्षमता और अद्वितीय स्वरूप के कारण बहुत लोकप्रिय है। मध्य प्रदेश की जनजातियों में नृत्यों, नाट्य प्रस्तुतियों और त्यौहारों के अवसर पर मुखौटे पहनने की परंपरा रही है। खेखड़ा ऐसा ही एक मुखौटा है जो मध्यप्रदेश की बैगा जनजाति द्वारा छेरता और होली के त्यौहार के दौरान पहना जाता है। छेरता का त्योहार कृषि कार्य पूर्ण होने के पश्चात पौष पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। उत्सव के दौरान बैगा युवक रावण और हिरण्यकश्यप के चरित्र का प्रतिनिधित्व करते मुखौटे पहनते हैं और अपनी उल्लास से परिपूर्ण कदमताल और भाव भंगिमाओं से दर्शकों का मनोरंजन करते हुए छेरता नृत्य प्रस्तुत करते हैं। होली के अवसर पर बैगा पुरुष मुखौटे पहन कर गिज्जी पहने हुई बैगा स्त्रियों के साथ फाग नृत्य करते हैं। गिज्जी बैगा स्त्रियों द्वारा  चेहरे को ढकने के लिए साही के कांटों से निर्मित किया जाता है। वर्तमान में साही के कांटों का स्थान बांस की खपच्चियो ने ले लिया है। खेखड़ा हिरण्यकश्यप और गिज्जी होलिका का प्रतिनिधित्व करते हैं। खेखड़ा मुखौटा आकार में लंबा है तथा इसमें काले रंग से मुखाकृति को स्पष्ट रूप से उभारा गया है। यह लकड़ी के एक ही टुकड़े को उकेर कर बनाया गया है इस मुखौटे को बनाने के लिए बडार और बहेड़ा की मुलायम लकड़ियों का प्रयोग किया गया है।

आरोहण क्रमांक :  93.322
स्थानीय नाम: खेखड़ा
जनजाति/समुदाय : बैगा
स्थान: मंडला, मध्य प्रदेश
माप: ऊंचाई : 93 सेमी;  चैड़ाई: 30 सेमी;

श्रेणी :’A‘ 

OBJECT OF THE WEEK
(31st August to 6th September, 2020)

KHEKHDA, A wooden mask

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

A wide range of masks are used by different tribal groups throughout the world and are very popular for its expression and unique form. Among the tribes of Madhya Pradesh there has been a tradition of wearing mask during dance, theatrical performance and festivals. Khekhda is one such mask belonging to Baiga tribe of Madhya Pradesh and is worn during the celebration of Chherta and Holi festival. Chherta is celebrated on the day of Paus Purnima post harvesting. During the celebration young Baiga male wear the mask representing the character of Ravan and Hiranyakashyap and perform Chherta dance to entertain the audience with their hilarious moves and gestures. On Holi festival the Baiga male put on the mask and perform phag dance with Baiga female wearing Gijji. Gijji is made up of quills of Porcupine fashioned into a face cover. Nowadays Porcupine quills are replaced by bamboo splits. Khekhda represents Hiranyakashyap and Gijji represents Holika. Khekhda mask is elongated in shape with clear demarcation of facial features by the application of black colour. It is carved out of single piece of wood. Soft woods like badaar and baheda are used for making this mask.

Accession No.:   93.322
Local Name –  KHEKHDA
Tribe/Community – Baiga
Locality – Mandla, Madhya Pradesh
Measurement  -Height -93 cm, Width- 30 cm
Category –  ‘A’

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