ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला – Online Exhibition Series-12

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला -12
03 सितंबर, 2020

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय अपनी स्थापना के समय से ही मानव जाति की गाथा को, समय और स्थान के परिप्रेक्ष्य में दर्शाने में संलग्न है। संग्रहालय भारतीय विरासत के संरक्षण, सवर्धन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है। इसकी अंतरंग और मुक्ताकाश प्रदर्शनियाँ देश भर में रहने वाले विभिन्न समुदायों की लुप्त प्रायः स्थानीय संस्कृतियों की प्रासंगिकता को प्रदर्शित करती है। इस महामारी के दौरान सभी को अपने साथ डिजिटल रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इं.गाँ.रा.मा.सं. 200 एकड़ में प्रदर्शित अपने प्रादर्शों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने हेतु एक नई श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीवन शैली के विभिन्न सौंदर्य गुणों और आधुनिक समाज में इसकी निरंतरता को उजागर करना है।

श्रृंखला के मुख्य आकर्षण में जनजातीय आवास, हिमालयी गांव, मरु ग्राम और तटीय गांव की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में दर्शायी गयी पारंपरिक वास्तु विविधता है। पारंपरिक तकनीकी पार्क मुक्ताकाश प्रदर्शनी में सरल तकनीकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने में रचनात्मक कौशल को दर्शाया गया है। शैल कला धरोहर प्रदर्शनी प्रागैतिहासिक काल के दौरान मानव विचारों और संचार की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पुनीत वन प्रदर्शनी जैव विविधता के संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को प्रदर्शित करती है। मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी में विभिन्न समुदायों के दैनिक जीवन से संबंधित कथाओं का चित्रण देखा जा सकता है। कुम्हार पारा प्रदर्शनी, भारत की मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा परंपराओं पर केंद्रित है।

वीथि संकुल- अंतरंग संग्रहालय भवन की 12 दीर्घाओं में मानव संस्कृतियों के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। इसके मुख्य आकर्षण में भारत सहित दुनिया भर से संकलित प्रादर्शों को मॉडल, ग्राफिक्स, डायरोमास, शोकेसेस के माध्यम से विषयवार प्रस्तुत किया गया है।

मांडवा गोहरी (भील-राठवा)
वीथि संकुल भवन की दीर्घा क्रमांक 04

ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रंखला के अंतर्गत इस बार हम आपका परिचय करा रहे है वीथि संकुल भवन की दीर्घा क्रमांक 04 में प्रदर्शित प्रदर्शनी ‘मांडवा गोहरी भील-राठवा के धार्मिक प्रादर्शों से । इस दीर्घा में मुख्यत: मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों में निवास करने वाली एक प्रमुख जनजाति भील की जीवन पद्धति  और उनकी भौतिक एवं अभौतिक संस्कृति को दर्शाया गया है। सामाजिक परिवर्तन की विभिन्न प्रक्रियाओं के प्रभाव के बावजूद गुजरात एवं मध्य प्रदेश के भील अपनी कुशल कृषि, प्रथाओं, मेलों और त्यौहारों, लकड़ी पर खूबसूरत नक्काशी एवं चित्रकला परंपराओं के लिए जाने जाते है। इस दीर्घा में प्रदर्शित प्रदर्शनी दिखाती है कि वे सदियों से अपनी संस्कृति और परंपरा को बनाए रखने में सक्षम रहे हैं। इस दीर्घा में समुदाय के लोगों द्वारा विभिन्न अवसरों पर किये जाने वाले अनुष्ठानों, विवाह तथा त्यौहारों को दर्शाया गया है। विशेष रूप से मांडवा गोहरी, गोल गाधेड़ो, गातले पूर्वज पूजा, भील और राठवा के विवाह मंडप, बाबा डुगर देवता का तीर्थ, इंद पूजा और पिथौरा आदि दीर्घा की दीवारों पर मिट्टी से उभारकर बनायी गयी आकृतियों पर सुंदर चिंत्राकन किया गया हैं। इस दीर्घा में प्रादर्शों के साथ-साथ प्रसिद्ध फोटोग्राफर स्वर्गीय आनंदी लाल पारीक द्वारा झाबुआ के भीलों पर आज से लगभग 60-70 वर्ष पूर्व  लिये गये छायाचित्र भी शामिल हैं। संग्रहालय द्वारा इन दुर्लभ छाया चित्रों का संकलन वर्ष 2005 में  किया गया था। इन चित्रों में उनकी गोदना परंपरा सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं, वेश-भूषा और आभूषणों को दर्शाया गया है। इस दीर्घा में लगभग 280 प्रादर्श  एवं 40 ब्लैक एंड व्हाइट छायाचित्र देखे जा सकते हैं।

Online Exhibition Series-12
3rd September, 2020

Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya engaged to portray the story of humankind in time and space since its inception. The Museum focuses on salvaging and revitalization of Indian heritage. Its indoor as well as open-air exhibitions showcase the relevance of the vanishing local culture of the different communities living across the country. With the aim of connecting everyone digitally during this pandemic, the IGRMS is presenting a new series of online exhibitions of its exhibit displayed across 200 acres. The main aim of the exhibition is to highlight the varied aesthetic qualities of the traditional lifestyle and its continuity in modern society.

The main attraction of the series includes the depiction of vernacular architectural diversity portrayed in the open air exhibitions of Tribal Habitat, Himalayan Village, Desert Village and Coastal Village. The Traditional Technology Park open air exhibition depicts the creative skills in using natural resources through simple technology. Rock Art Heritage open air exhibition is a remarkable example of expression of human thoughts and communication during the prehistoric times. The Sacred Grove open air exhibition showcases the traditional practices and way of conserving the bio-diversity. The depiction of narratives or stories related to every day life of various communities can be seen in Mythological Trail open air exhibition. The Kumhar Para open air exhibition focuses on the pottery and the terracotta traditions of India.

The indoor museum building Veethi Sankul houses 12 galleries depicting the diverse facets of human cultures. Its main attraction includes the thematically arranged galleries with models, graphics, diaromas, showcases, panels of the valuable ethnographic collections of the museum from different parts of India and abroad.

Mandwa Gohari (Bhil and Rathwa)
Gallery No.4 of Veethi Sankul (Indoor Gallery)

Under the online exhibition series of IGRMS, this time, we introduce an exhibition from Gallery No.4 of Veethi Sankul (Indoor Gallery) called ‘Mandwa – Gohari’, a display projecting the socio-religious life of the Bhil and Rathwa tribe of India. The gallery showcases the traditional life-style, tangible and intangible cultures of the Bhils, a prominent tribe living mainly in Madhya Pradesh, Gujarat, and Rajasthan Maharashtra. Despite the influence of various social change processes, the Bhils of Gujarat and Madhya Pradesh are still known for their efficient agricultural practices, profound fairs and festivals, beautiful wood carving and painting traditions. The exhibition displayed in this gallery shows their rich culture and traditions that they have maintained for centuries. It depicts various aspects of rituals related to the marriage ceremony and festivals performed by the community members on various occasions. In particular, the gallery showcases the beautiful art of Wall-reliefs depicting the scenes of Mandwa Gohri, Gol Gadhedo, Gathela Ancestor Puja, Bhil- Rathwa wedding pavilions, Shrine of Baba Dugar Devta, Ind Pooja and Pithora, etc. The gallery’s impressive collection includes photographs taken by renowned photographer late Anandi Lal Pareek on the Jhabua Bhils about 60-70 years ago. These rare black and white photographs were collected by the museum in the year 2005. The photographs depict various aspects of traditional Bhil life-ways, and it also provides a scintillating view of their dress, jewelry, and tattooing tradition. About 280 exhibits and 40 black and white photographs can be seen in this gallery.

पारंपरिक ‘गोल गाधेड़ों’ त्यौहार एक दृश्य / A view of Traditional Gol Gadhedo Festival
गोल गाधेड़ो  उत्सव का एक भित्ति चित्र  /  A mural painting of Gol Gadhedo at Veethi Sankul Gallery no-4
पारंपरिक गातला का एक दृश्य  / A view of traditional Gatala
पारंपरिक रूप से पत्थर पर निर्मित गातला का एक दृश्य  /  A view of Traditional Gatala on stone
पारंपरिक वेश-भूषा में भील युवती /A Bhil lady in traditional attire
पारंपरिक बाबा डुगर के एक दृश्य  / A view of traditional Baba Dugar Dev
बाबा डुगर देव  को समर्पित अनुष्ठान / ituals dedicated to Baba Dugar Dev
बाबा डुगर देव पूजा स्थल / Sacred place of Baba Dugar Dev
बाबा डुगर देव – टेरकोटा मन्नत / Offerings of terracotta temple to Baba Dugar Dev
Introductory video on the Gallery-4 at Veethi Sankul- Mandwa Gohari (Bhil and Rathwa)