07-13 सितंबर/September, 2020

‘सप्ताह का प्रादर्श’
(07 से 13 सितंबर, 2020)

बरसेला , स्मृति स्तम्भ

कोविड-19 महामारी के प्रसार के कारण दुनिया भर के संग्रहालय बंद है लेकिन यह सभी अपने दर्शकों के साथ निरंतर रूप से जुड़े रहने के लिए विभिन्न अभिनव तरीके अपना रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ने भी इस महामारी द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियो का सामना करने के लिए कई अभिनव प्रयास प्रारंभ किए है। अपने एक ऐसे ही प्रयास के अंतर्गत मानव संग्रहालय ‘सप्ताह का प्रादर्श’ नामक एक नवीन श्रृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पूरे भारत से किए गए अपने संकलन को दर्शाने के लिए संग्रहालय इस श्रंखला के प्रारंभ में अपने संकलन की अति उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कर रहा है जिन्हें एक विशिष्ट समुदाय या क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के संदर्भ में अद्वितीय माना जाता है। यह अति उत्कृष्ट कृतियां संग्रहालय के ‘AA’और ‘A’ वर्गों से संबंधित हैं। इन वर्गों में कुल 64 प्रादर्श हैं।

हिमाचल प्रदेश में पाषाण स्मृति स्तंभों को स्थापित करने की परंपरा विविधतापूर्ण है एवं मुख्य रूप से मृतकों के पंथ से संबंधित है। मृतकों की आत्माओं के प्रति सम्मान को परम धार्मिक कार्य (पुण्य) माना जाता है। मृतकों की आकृतियों को इस तरह से स्लैब पर उकेरा जाता है कि इस उद्देश्य के लिए उपयोग किए गए मूल सैंडस्टोन की मोटाई बरकरार रहे। बरसेला ठेठ पाषाण स्मृति स्तम्भ हैं जिनमें राजाओं, रानियों और उपपत्नियों के नक्काशीदार और उकेरे हुए चित्र होते हैं। मंडी एवं कुछ अन्य रियासतों में इसे शाही विशेषाधिकार माना जाता था। इसे सती स्टोन भी कहा जाता है। सती हो गयी रानी और उपपत्नियों को पैनल में मृतक शासक की आकृति के नीचे उकेरा जाता था। इस प्रकार के स्मृति स्तंभों को राजा के परिवार द्वारा उसकी मृत्यु के एक वर्ष पश्चात तक पूजा जाता था। बरसेला महत्वपूर्ण स्मृति पाषाण या स्तंभ हैं जिनसे तत्कालीन समय में प्रचलित संस्तरण युक्त सांस्कृतिक व्यवहारों की जानकारी प्राप्त होती है |

आरोहण क्रमांक :  99.349
स्थानीय नाम: बरसेला
जनजाति/समुदाय : लोक
स्थान: कुल्लू, हिमाचल प्रदेश
माप: ऊंचाई : 127 सेमी;  चैड़ाई: 70 सेमी;

श्रेणी :’A‘ 

OBJECT OF THE WEEK
(7th to 13th September, 2020)

BARSELA, Memorial Stone.

Due to spread of COVID-19 pandemic the museums throughout the world are closed but identifying different innovative ways to remain connected to their visitors. Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (National Museum of Mankind) has also taken up many new initiatives to face the challenges posed by this pandemic. In one such step it is coming up with a new series entitled ‘Object of the Week’ to showcase its collection from all over India. Initially this series will focus on the masterpieces from its collection which are considered as unique for their contribution to the cultural history of a particular ethnic group or area. These masterpieces belong to the “AA” & “A” category. There are 64 objects in these categories.

The tradition of erecting memorial stones in Himachal Pradesh is varied and relates mainly to the cult of the dead. The reverence of souls of the dead is considered to be a religious act of merit (Punya). The figures of the dead are carved upon the slabs in such a way that the thickness of the original sandstones used for the purpose remains intact. Barsela are the typical memorial stones bearing carved and engraved pictures of the kings, queens and concubines. In Mandi and some other princely states it was considered as a royal privilege. It is also called as sati stones where the figures of queen and concubines who performed sati, were carved in the panels below the image of the deceased ruler. These memorial stones were worshipped by the deceased family for one year after the incidence of the death of the king. Barsela are valuable memorial stone slabs or pillars for ascertaining the old traditional hierarchical cultural practices.

Accession No.:   99.349
Local Name –  BARSELA
Tribe/Community – Folk
Locality – Kullu, Himachal Pradesh
Measurement  -Height -127 cm, Width- 70 cm
Category –  ‘A’

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